डिस्काउंट के दंगल में ‘डील मेकर’ ट्रम्प ढेर , भारत ने दिखा दिया कि हम “ फादर ऑफ डील्स” हैं

रूस से तेल क्या लिया, ट्रम्प चाचा तो फूफा जी की तरह मुंह फुलाकर बैठ गए थे और टैरिफ 50% कर दिया था. साथ ही ट्रम्प साहब यह भी चाहते थे कि दुनिया उन्हें ‘विश्व शांति का मसीहा’ कहे, लेकिन उनके पेट में तब मरोड़ उठी जब भारत ने ईयू के साथ डील की सीटी बजा दी. इस पर ट्रम्प साहब , उस मोहल्ले के दुकानदार की तरह चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे, “मोदी जी, एक बार दुकान पर तो आइए, छप्पर फाड़ स्कीम दूंगा!” ट्रम्प को लगा कि अगर भारत ने उनसे सामान नहीं लिया, तो उनकी ‘ग्रेटेस्ट डीलर’ वाली इमेज का दीवाला निकल जाएगा. ट्रम्प ने भांपा कि अगर वो अभी ‘दानवीर’ नहीं बने, तो इतिहास उन्हें ‘कंजूस’ न लिख दे. बस फिर क्या था? आनन-फानन में 50% वाला टैरिफ 18% पर गिर गया, जैसे स्टॉक क्लियरेंस सेल चल रही हो. टैरिफ 18% क्या हुआ, फिर ऐसा लगने लगा , जैसे हिंदी फिल्म के अंत में दोस्त से दुश्मन बने , यारों का एक दूसरे के लिये प्यार वापस जाग जाता है . ट्रम्प व मोदीजी की तरफ से दोस्ती की ऐसी मिसालें दी जाने लगीं जैसे जय-वीरू का पुनर्जन्म हो गया हो गया हो. विपक्ष भले ही नुकसान का कैलकुलेटर लेकर बैठा रहे, साथ ही कितना भी प्रत्यक्ष तथा छद्म नुकसान का हल्ला मचा ले (जिनमें से कुछ कालांतर सही भी साबित हो जाएं ),पर भारत की आम जनता निहाल हो चुकी है और शेयर बाज़ार भी ऐसे डांस कर रहा है जैसे उसे डिस्को की चाबी मिल गई हो.
इंजी . मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स

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