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Tuesday, May 12, 2026
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सनसनीखेज़ झूठी खबर-अब आरक्षण की होगी नई रेस: जो जितना बड़ा ‘कंगाल’, राजनीति में उतना ही बेमिसाल

पिछले दिनों केंद्र की भाजपा सरकार व प्रधानमंत्री मोदी जी ने नाना प्रकार से महिला आरक्षण के मुद्दे के लिये आव्हान कर ढेर सारी सुर्खियां बटोरी (हांलाकि प्रस्ताव लोकसभा में गिर गया ). उससे तथा बिहार में अतिगरीब तबको के लोगो को आरक्षण व छ.ग. में उन्हे न्यूनतम दर में अनाज देने की नीति से प्रेरित होकर, “अति गरीब” लोगों ने एक संघ बना लिया। अब वे लोग लोकसभा एवं विधानसभा के चुनावों में अति गरीब लोगों के लिए आरक्षण मांग रहे हैं। अति गरीब संघ के एक नेता फकीरचंद ने कहा है कि भारतीय संविधान के अनुसार सभी जाति एवं सभी धर्म में किसी प्रकार का भेदभाव नही होना चाहिए। शुरुवात के 40 सालों में जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाना उचित था। मेरा तो ये कहना है कि जातिगत आरक्षण का लाभ लेकर जिन लोगों ने किसी प्रकार का चुनाव जीता है, उन्हे तथा उनके परिवार के किसी भी सदस्य को आरक्षित श्रेणी के किसी भी प्रकार के चुनाव की पात्रता समाप्त कर दी जाए । अब सरकार लैंगिकता के आधार पर आरक्षण देने जा रही है परंतु केवल महिलाएं ही दबी कुचली या पीड़ित नहीं होती हैं. हम अतिगरीब लोग सबसे ज़्यादा शोषण का शिकार हैं . फकीरचंद जी का मानना है कि अति-गरीब आरक्षण लागू होने के बाद चुनाव प्रचार का तरीका ही बदल जाएगा। नेताजी सफेद कड़क कुर्ते में नहीं, बल्कि ‘इमानदारी की धूल’ से सनी हुई बनियान में वोट मांगेंगे। जो प्रत्याशी सबसे कम ‘चुनावी खर्च’ का बिल पेश करेगा, उसे ‘बोनस वोट’ भी मिले. संघ के एक उत्साही सदस्य कंगाली राम ने दलील दी कि चुनाव आयोग को प्रत्याशियों के हलफनामे में संपत्ति की जगह , इंडियन आइडल प्रोग्राम की तर्ज़ पर ‘विपत्ति’ की सूची मांगनी चाहिए। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए संघ के प्रवक्ता दुकालू राम ने कहा कि हमारा मानना है कि किसी भी सांसद या विधायक चुनाव के प्रत्याशी के लिए पात्रता बदल दी जानी चाहिए। एक बार चुनाव जीतकर राजनेता , अति संपन्न पैसे वालों की श्रेणी में आ जाते हैं। अति संपन्न श्रेणी के लोगों की चुनाव लड़ने की पात्रता समाप्त कर देनी चाहिए. कम पैसे वाले चुनाव में कम पैसे खर्च करेगें। उससे चुनाव प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न होगी और चुनाव में भी राष्ट्रीय धन का भी नुकसान कम होगा. इसके अलावा गरीबी मिटाने का इससे तेज ‘शॉर्टकट’ और क्या होगा कि आदमी चुनाव जीते और गरीबी की रेखा को छलांग मारकर सीधा स्विस बैंक की दहलीज पर उतर जाए?”
इंजी. मधुर चितलांग्या “ माधो”
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स

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