चंपारण्य : भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की पावन धरती

महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में विश्वविख्यात है राजिम के समीप स्थित चंपारण्य धाम

रायपुर। चंपारण्य धाम छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक ऐसा पावन केंद्र है, जहां भक्ति, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। धार्मिक नगरी राजिम के समीप स्थित यह धाम महान वैष्णव संत महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है। आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह स्थान वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में विश्वविख्यात है राजिम के समीप स्थित चंपारण्य धाम वैष्णव संप्रदाय और विशेष रूप से गुजरात के श्रद्धालुओं के लिए चंपारण्य का अत्यंत विशेष महत्व है। महाप्रभु वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक माने जाते हैं और गुजरात में उनके अनुयायियों की संख्या बहुत अधिक है।

महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में विश्वविख्यात है राजिम के समीप स्थित चंपारण्य धाम वैष्णव संप्रदाय और विशेष रूप से गुजरात के श्रद्धालुओं के लिए चंपारण्य का अत्यंत विशेष महत्व है। महाप्रभु वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक माने जाते हैं और गुजरात में उनके अनुयायियों की संख्या बहुत अधिक है।महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में विश्वविख्यात है राजिम के समीप स्थित चंपारण्य धाम वैष्णव संप्रदाय और विशेष रूप से गुजरात के श्रद्धालुओं के लिए चंपारण्य का अत्यंत विशेष महत्व है। महाप्रभु वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक माने जाते हैं और गुजरात में उनके अनुयायियों की संख्या बहुत अधिक है।

    

श्रीनाथजी और कृष्ण भक्ति से जुड़े वैष्णव समाज के लिए चंपारण्य तीर्थ के समान माना जाता है। यही कारण है कि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। कई वैष्णव परिवार अपने जीवन में कम से कम एक बार चंपारण्य धाम की यात्रा को अत्यंत शुभ मानते हैं।

More Topics

‘मन की बात’ में गूंजा छत्तीसगढ़ का ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’अभियान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया स्थानीय संसाधनों से पोषण...

इसे भी पढ़े