आज के दौर में सच को ढूंढना उतना ही मुश्किल है जितना दिल्ली की धुंध में सूरज को. स्व-घोषित न्यूज़ पोर्टल , यू ट्यूबर और सोशल मीडिया के तथाकथित फर्ज़ी पत्रकारों ने सूचना के नाम पर ऐसा रायता फैलाया है कि आम आदमी अब सूक्ष्मदर्शी लेकर सच की तलाश करते-करते थक चुका है. शुरुआती दिनों में यह अखाड़ा एकतरफ़ा था. एक खास विचारधारा के ‘भक्त’ अपनी पोस्टों से विरोधियों को चारों खाने चित कर रहे थे. तब लगता था जैसे झूठ बोलने का कॉपीराइट उन्हीं के पास है. मगर अब हवा बदल गई है. विरोधी भी ‘डिजिटल ट्रेनिंग’ लेकर मैदान में उतर आए हैं. दोनों पक्ष एक-दूसरे को उन्हीं के हथियारों से ‘हलाकान’ (परेशान) कर रहे हैं. समस्या यह है कि अब भक्त और चमचे अपनी-अपनी पोस्टों पर खुद ही ताली बजा रहे हैं जबकि आम आदमी खीजने लगा है. अब देखने वाली बात यह होगी कि इन फर्ज़ी पोस्टों का समाधान कौन निकाल सकता है ? मुझे लगता है कि अब सभी दलों को मिलकर ‘मिथ्या संदेश रोकथाम एवं निवारण समिति’ बनाना चाहिये और उसका चेयर परसन अमित शाह को बना देना चाहिये क्योंकि शाहजी ने फ़ेक न्यूज़ के बारे में बहुत गहराई से रिसर्च की हुई है , वह किसी पीएचडी से कम नहीं है. उन्हें पता है कि:
1.कैसे एक छोटी सी चिंगारी को ‘आईटी सेल’ के पेट्रोल से दावानल बनाया जाता है.
2. कैसे किसी पुरानी फोटो को ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ करके इतिहास का नया पन्ना बता दिया जाता है.
3. और सबसे महत्वपूर्ण—कैसे फ़ेक न्यूज़ की सप्लाई चेन को “स्विच ऑफ” करना है.
इंजी. मधुर चितलांग्या “ माधो “
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


