मुझे भूल क्यों गए विपक्षियों ?

दशकों से, हर बार चुनाव आता ,एक हाइप क्रिएट हो जाता और फिर चुनाव परिणाम के बाद शुरू हो जाता था समीक्षाओं और व्यक्तव्यों का दौर. जीतने वाला हमेशा इसे विपक्षी की गलतियों का खामियाजा और अपनी पोलिसी को जनता द्वारा समर्थन बताता था पर पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जहां भी चुनाव हुए, वहां पर विपक्षी पार्टियों द्वारा , हारने के बाद, हमेशा हार स्वीकारने की जगह, मुझमें छेड़-छाड़ के इलज़ाम लगाये जाते रहे. मैं चुप-चाप सब सहती रहती कि नाम ही हुआ, क्या हुआ जो बदनाम भी हुए . जी हां, मैं ईवीएम यानि इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन हूं . इस बार महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में सबकी बोलती बंद रही, शायद मेरा ‘सॉफ्टवेयर’ सबको सूट कर गया। इसलिये परिणाम के बाद विपक्ष की टीम के एक भी सदस्य ने मेरे को लेकर चूं-चां नहीं की. अब इसी साल बंगाल के चुनाव आयेंगे, अगर वहां नतीजे मनमुताबिक न आए, तो देखती हूं अपनी हार का ठीकरा किसके सिर पर फोड़ोगे ? प्लीज, मुझे याद रखना, मुझे भूल न जाना .
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स

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