आस्था की अग्नि में राजनीति का घी, मेला प्रशासन ने पूछा—हुजूर आपकी पदवी क्या है जी?

मौनी अमावस्या पर प्रयागराज संगम की लहरों पर भक्ति कम और ‘शक्ति प्रदर्शन’ ज्यादा दिखा। पुलिस ने ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का रथ क्या रोका, भक्त समर्थकों और खाकी के बीच कुश्ती शुरू हो गई। बिना नहाए लौटे महाराज धरने पर बैठे, तो विपक्ष की बांछें खिल गईं। कल तक जो धर्म को अफीम बताते थे, आज वे ‘शंकराचार्य बचाव’ अभियान के कैप्टन बने घूम रहे हैं। कांग्रेस और सपा को अचानक धर्म की ऐसी चिंता सता रही है, मानो शंकराचार्य का पट्टाभिषेक उनके ही चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा हो। उधर प्रशासन डंडा लेकर ‘टाइटल’ चेक कर रहा है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत का खून भी खौल उठा जब पूछा गया—”आप शंकराचार्य कैसे?” यह तो वही बात हुई कि दूल्हा मंडप में बैठा है और प्रशासन पूछ रहा है कि आधार कार्ड पर ‘पति’ क्यों नहीं लिखा? धर्म की नाव अब राजनीति के चप्पू से चल रही है! गजब का मेला है; पुलिस पदवी जांच रही है, महाराज मान्यता का अपमान बता रहे हैं और विपक्षी नेता ‘बहती गंगा’ में अपनी सियासी किस्मत चमका रहे हैं। संगम का पानी बेचारा सोच रहा होगा—नहाना किसे था?
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स

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