देश में एक समय ऐसा आया कि राजनेता व सत्ता पक्ष पूरी तरह से मनमानी पर उतर आए थे . विपक्ष की पार्टियों का विरोध केवल शोर की तरह लगता था . ना कोई सुनवाई थी और ना ही बदलाव की कोई आशा . तब अन्ना हज़ारे ने अपनी हिम्मत दिखाई और उनकी हुंकार से परिवर्तन की आंधी चली . उस शुरुआत ने देश का पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया . छत्तीसगढ़ की प्रदेश कांग्रेस को अब अमूमन वही स्थिति दिखाई दे रही है . जहां जनता की तरफ से उनके पक्ष में चमत्कारिक हवा , जो उनकी नैया पार लगा दे , के लिये अन्ना जी की तरह के दृढ़ संकल्प वाले महापुरुष का साथ चाहिये . प्रदेश कांग्रेस की बैठक में पूर्व महाबली मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने जब यह बात रखी तो माहौल में आशा की किरण दौड़ गई . जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी आदत के अनुसार , उनका पुरजोर विरोध किया तो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष महंत ने उन्हें चेताया कि अगले चुनाव के पहले अपनी स्थिति सुदृढ़ कर लें वर्ना मोटा भाई शाह उनसे चक्की पिसवा देंगे . अन्ततः कांग्रेस ने लोकल अन्ना की तलाश के लिये विज्ञापन दे दिया है . विज्ञापन में स्पष्ट है—हमें ‘अन्ना’ चाहिए, ‘अम्बानी’ नहीं. फंड की उम्मीद न रखें, केवल आशीर्वाद और आंदोलन का मौका मिलेगा . लोकल अन्ना जी के लिये योग्यता , अनशन पर बैठने का अनुभव कम से कम 10 दिन का , सफेद टोपी और धोती अनिवार्य , जिसकी फाइलें “ईडी की पहुंच से बाहर हों ताकि वह “मोटा भाई” की चाणक्य नीति को अपनी लाठी से मात दे सके . यदि आप या आपका कोई परिचित अन्ना जी की तरह निर्भीक , बेबाक व देशप्रेमी गांधीवादी है तो इस मौके को लपक सकते हैं .
इंजी. मधुर चितलांग्या “ माधो “
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


