पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अब तक का सबसे व्यापक अभियान चल रहा है और इसके नतीजे जमीन पर साफ दिखाई देने लगे हैं। राज्यभर में संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान, सत्यापन और वापसी की प्रक्रिया को तेज करते हुए होल्डिंग सेंटरों की संख्या महज एक सप्ताह के भीतर बढ़कर 11 हो गई है।
इन केंद्रों में फिलहाल साढ़े तीन सौ से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक रखे गए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर 24 परगना के बसीरहाट क्षेत्र में है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठियों की ओर से बना लिये गये अवैध ढांचों पर बुलडोजर की कार्रवाई भी लगातार चल रही है।
यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिक संतुलन की रक्षा का एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से बसीरहाट, बनगांव, मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया जैसे सीमावर्ती जिलों में निगरानी और पहचान अभियान को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया गया है। बसीरहाट उपमंडल के टेटुलिया, चारघाट और मेडिया में हाल ही में शुरू हुए नए केंद्रों में सैकड़ों संदिग्ध घुसपैठियों को रखा गया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि अनेक घुसपैठियों ने रिश्वत देकर पहचान पत्र, आधार और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज हासिल कर लिए थे। लेकिन जब सुरक्षा एजेंसियों के सामने उनकी जांच हुई तो उनके पास बांग्लादेश सरकार द्वारा जारी पहचान दस्तावेज ही मिले। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वर्षों से संगठित तरीके से अवैध घुसपैठ और दस्तावेज जालसाजी का खेल चल रहा था। अब सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परत दर परत जांच कर रही हैं।


