अद्भुत दौर है! देश के मुखिया ने अंतरराष्ट्रीय संकट को देख पेट्रोल बचाने की बात क्या की, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलपतियों ने सीधे ‘पैदल यात्रा क्रांति’ का ही ऐलान कर दिया। विपक्ष अपनी कुत्ते की पूंछ सी आदत के अनुसार बाल की खाल निकालने में व्यस्त है—उन्हें हर अपील में लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही का धुआं नजर आता है। उधर, ‘परम भक्तों’ की टोली ने देशवासियों को गद्दार साबित करने का नया पैमाना ढूंढ लिया है।अब व्हाट्सएप ग्रुपों में लंबे-चौड़े ज्ञान के झरने बह रहे हैं: “गाड़ी गैराज में खड़ी करो, क्योंकि पैदल चलना सेहत के लिए रामबाण है! जो सोना खरीदे, वो साक्षात देशद्रोही है!” भाई साहब, बिना बस-मेट्रो की व्यवस्था किए सीधे पैदल चलने का यह दिव्य ज्ञान सुनकर घुटने भी शर्म से पानी-पानी हो गए हैं। गजब तो तब होता है जब मंत्रियों के विशाल 10 गाड़ियों के काफिले में से 5 गाड़ी कम हो जाए, तो उसे ‘ऐतिहासिक त्याग’ बताकर राजनीतिक लाभ का ऐसा ढोल पीटा जाता है कि कान पक जाएं।विपक्ष इस पर निंदनीय तरीके से छाती पीट रहा है और अंधभक्त उसे राष्ट्रप्रेम की घुट्टी बताकर जबरन पिला रहे हैं। इस महायुद्ध में आम आदमी त्रस्त है, पर सोशल मीडिया के शूरवीर पोस्ट पर पोस्ट ठोककर एक-दूसरे की पीठ थपथपा रहे हैं। तेल का खेल तो अंतरराष्ट्रीय है, मगर हमारे यहां जो ‘चमचों’ और ‘भक्तों’ के बीच का वाक-युद्ध है, वह विशुद्ध रूप से घरेलू और परम खिझाने वाला है। कृपया इस स्वघोषित पोस्ट द्वारा पेलम-पाल ज्ञान को थोड़ा धीमा करें, वरना तेल बचे न बचे, आम जनता का मानसिक संतुलन जरूर खत्म हो जाएगा!
इंजी. मधुर चितलांग्या “माधो”
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


