खामोश खिलाड़ी “विष्णु” का सुदर्शन चक्र

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अक्सर ‘शोर’ को ही शक्ति मान लिया जाता था, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। शुरुआती दौर में ऐसा लगा मानो वे किसी भव्य बारात के ‘सादे’ दूल्हे हों, जिन्हें ओ.पी. चौधरी जैसे ‘युवा तुर्क’ और पुराने दिग्गजों की चमक फीकी कर देगी। पर हुआ इसके उलट। साय जी ने वह हुनर दिखाया कि सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी। रजिस्ट्री के दाम बढ़ाकर जो आक्रोश पनपा था, उसे उन्होंने इतनी मधुरता से शांत किया कि लोग अपना गुस्सा ही भूल गए। एक पूर्व मंत्री व सांसद के अनावश्यक दबाव को किनारे लगाने में उन्होंने जम्बूरी के मध्यम से जो ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की, वह चाणक्य नीति को भी मात दे गई। भाजपा के अनेक अनुभवी विधायक जो खुद की सरकार को घेरने की तैयारी में थे, आज वे कोने में बैठकर सिर्फ अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सबसे मजेदार दृश्य तो विपक्ष का है, जहां भूपेश बघेल जैसा ‘तेज-तर्रार’ बल्लेबाज शॉट मारने को बेताब है, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने गेंदबाजी इतनी धीमी और सटीक रखी है कि बल्लेबाज को समझ ही नहीं आ रहा कि बल्ला चलाए या क्रीज छोड़ दे। उन्हें छत्तीसगढ़ का शिवराज कहा जाये तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी. इस सब पर आपकी क्या राय है ?
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स

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