जीवन मंत्र : नये साल के संकल्प , कैसे होंगे हर हाल में सफल ?

मैंने भी उस बात की सहमति के लिये सिर हिलाते हुए कहा , पर मुझे लगता है कि आजकल साल के अंतिम दिनों से लोग नये साल का इंतज़ार , नये संकल्प लेने के लिये करते हैं . जैसे कोई मोटे शरीर वाला संकल्प करता है कि वह नये साल में डाइटिंग शुरु करेगा , इस कारण साल के आखरी दिन तक खूब जी भर के खाता है . कोई दारू प्रेमी तय करता है कि वह नये साल में वह शराब से दूर रहेगा इसलिये साल की आखरी रात में छककर पीता है . कोई तय करता है कि वह अगले वर्ष से सुबह जल्दी उठेगा , इस कारण से 31 तारीख को वह पूरी रात सोता ही नहीं . इसी तरह से ना जाने कितने लोग नये साल के लिये नये रिज़ोल्यूशन बनाते हैं अर्थात वे पिछले सभी दुख , दर्द , असफलता को ‘छोड़ो कल की बातें’ के अंदाज़ में हटाने के पहले सेलेब्रेट करते हैं . मेरी बात सुनकर पत्रकार माधो हंसते हुए बोल उठे , सच कहते हो . इतने सारे लोग नये साल में अपने लिये नये संकल्प निर्धारित करते हैं कि ऐसा लगता है जैसे नया साल आता ही है नये संकल्पों को लागू करने के लिये . परंतु वह संकल्प, शुरुआती दो चार दिन निभाने के जोश के कुछ दिनों बाद टांय टांय फिश हो जाता है . मैंने भी हंसते हुए कहा कि ‘ चार दिनों की चांदनी फिर अंधेरी रात’ कहावत की शुरूआत शायद इन्हीं संकल्पकर्ताओं के कारण हुई होगी . पर इसका इलाज़ क्या है ? पत्रकार माधो ने अब गम्भीर होकर हम सब के लिये एक अनुकरणीय बात कही , ‘ यदि हम रोज़ की सुबह को साल का पहला दिन मानते हुए अपने संकल्प को दोहराते हुए उसपर अमल करें तो वह संकल्प अवश्य ही सफल होगा ‘.

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