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Tuesday, May 12, 2026
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दिल की बात -लोग जिसे कमज़ोरी समझते थे , दरअसल वहीं से सफलता का झरना फूटना था

एक घटना ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया. एक बच्चा, अपनी आंखों में ढेर सारी मायूसी और कंधों पर हीन भावना का बोझ लिए मेरे पास आया. रुआंसे स्वर में वह बोला— “मैं बहुत कमजोर हूं. मैदान में मेरे साथी मुझसे तेज भागते हैं. वे मुझे अपनी क्रिकेट टीम में शामिल नहीं करना चाहते. वे मेरा मजाक उड़ाते हैं, मुझे हार का कारण मानते हैं. मुझे देखते ही वे चिल्लाते हैं— ‘गड्ढा है गड्ढा, जिस टीम में जाएगा उसका बंटाधार कर देगा’.” मैंने उसकी आंखों में झांका और पूछा— “बेटा, क्या कोई ऐसी बात है जिसमें तुम सबसे बेहतर हो?” वह सर झुका कर बोला— “उनकी नाराजगी की एक वजह यह भी है कि मैं पढ़ाई में उनसे तेज हूं, खासकर भाषा पर मेरी पकड़ अच्छी है. अब तो उनके जैसा दिखने और उनकी नफरत से बचने के लिए मैं परीक्षा में जानबूझकर गलतियां करने लगा हूं.” यह सुनकर मेरा मन भर आया. कितनी विचित्र और दुखद स्थिति है न! जब एक प्रतिभा, स्वीकार्यता पाने के लिए खुद को छोटा बनाने लगे. मैंने उसे पास बिठाया और समझाया— “इंसान न तो चीते सा तेज दौड़ सकता है, न पक्षियों सा उड़ सकता है, न मछली सा तैर सकता है. प्रकृति ने उसे शारीरिक रूप से सबसे सक्षम नहीं बनाया, लेकिन उसे ‘दिमाग’ दिया. आज इंसान अपनी उसी बुद्धिमत्ता के बल पर बादलों को चीर रहा है और गहरे समंदर की थाह ले रहा है. फिर उसे उत्साहित करते हुए बोला , तुम भी बैठकर सोचो और देखो कि तुम अपनी प्रतिभा का उपयोग कैसे बेहतर कर सकते हो ? वह लड़का चला गया. कुछ दिनों बाद जब वह लौटा तो उसके चेहरे पर एक अलौकिक आत्मविश्वास था. उसने कृतज्ञता से मेरा हाथ थाम लिया और चहकते हुए बोला , मैंने आपकी बताई बात के बारे बहुत सोचा. फिर मैंने उनके साथ खेलने की जगह बाहर बैठकर आंखों देखा हाल सुनाना चालू किया . जल्द ही मेरी शब्दों में पकड़ और शैली सुधर गई . अब दोनों टीम के खिलाड़ी मेरी इज़्ज़त करते हैं और खेल शुरू होने के पहले और बाद में मुझसे बात करते व हाथ मिलाते हैं. अब मैं उनका ‘गड्ढा’ नहीं, उनकी टीम की ‘शान’ हूं. यह सुनकर उसके साथ मेरी भी आंखें नम हो गईं . हम सब ताउम्र दूसरों के जैसा बनने की नाकाम कोशिश में खुद को लहूलुहान करते रहते हैं. आप सब ठंडे दिमाग से अपने भीतर के हुनर , गुण , काबिलियत पर नज़र डालें , उसे समझें और उसके अनुसार आगे बढें . मुझे पूरा विश्वास है कि सफलता के अलावा बेहद आत्म संतोष भी मिलेगा . मेरी शुभकामनाएं …..

इंजी. मधुर चितलांग्या,”माधो”
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स

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