नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भिलाई निगम के अवैध प्लाटिंग मामले में प्रश्नांकित हुआ।
नियम विरुद्ध भूमि प्रयोजन को बदलने वाले आरोपियों पर कसने वाला कानूनी शिकंजा।
अवैध कालोनियों का मामला विधानसभा कार्यवाही का मुद्दा बनकर सामने आया ।
अवैध प्लाटिंग मामले में खलबली मचाने वाला विधायक रिकेश सेन का विधानसभा प्रश्न ?
विधानसभा सत्र जुलाई का प्रश्न 25. (*क्र. 317) जिसे विधायक रिकेश सेन में पूछा कि क्या उप मुख्यमंत्री (लोक निर्माण) महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि वर्ष 2024 से 17-06-2026 तक वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पालिक निगम, भिलाई में अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति कृषि भूमि का डायवर्सन कर बनाई जा रही कॉलोनियों पर प्रशासन द्वारा अब तक क्या ठोस कानूनी कार्रवाई की गई है ? कुल कितने मामलों में एफ.आई.आर. (FIR) दर्ज की गई है ? कितने खसरों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई है ? वार्डवार एवं खसरा नंबर सहित विवरण देवें ? (ख) क्या प्रशनांश (क) अनुसार अवैध प्लाटिंग को रोकने में असमर्थ अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतें मिली हैं ? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई ?

अभूतपूर्व कार्यवाही की जानकारी विधानसभा प्रश्नोत्तरी से आने पर गड़बड़ी करने वालों को नींद उड़ गई है।
उप मुख्यमंत्री (लोक निर्माण) श्री अरूण साव) ने विधानसभा प्रश्नोत्तरी में जानकारी दी की वर्ष 2024 से दिनांक 17.06.2026 तक वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति कृषि भूमि का डायवर्सन कर बनाई जा रही 37 अवैध कॉलोनियों पर छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के प्रावधानों के अधीन कार्यवाही करते हुए निर्मित संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। ग्राम – कोहका के 57, ग्राम-जुनवानी के 29 एवं ग्राम- कुरूद के 169 खसरा नंबर इस प्रकार कुल 255 खसरा नंबरों के कुल रकबा 35.897 हेक्टेयर भूमि के विक्रय एवं पंजीयन पर रोक लगाने हेतु कलेक्टर दुर्ग एवं उप-पंजीयक से पत्राचार किया गया है। अवैध प्लाटिंग संबंधित प्रतिबंधित खसरों की सूची नगर पालिक निगम भिलाई की वेबसाईट में अपलोड की गई है तथा नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा ऐसे प्रतिबंधित खसरों की भूमि पर भवन अनुज्ञा प्रदान नही की जा रही है। विवरण संलग्न प्रपत्र अनुसार है। 06 अवैध प्लाटिंगकर्ताओं के विरूद्ध सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है एवं अन्य के विरूद्ध परिवाद दायर करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) प्रश्न उद्भूत नहीं होता पूरी जानकारी संलग्न “परिशिष्ट – तेरह” में होना अभिलिखित है । उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह जवाब उन अनुत्तरित प्रश्नों की वस्तुस्थिति अजगर करने वाला है। जिन्हें अब तक निरुत्तरित छोड़ दिया जाता था ।
विधानसभा प्रश्नोत्तरी में दी गई जानकारी अनुसार कुल 06 अवैध प्लाटिंगकर्ताओं के विरूद्ध सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है यह जानकारी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने वाली सीधी कार्यवाही है तथा यह मामला तहसीलदार के पदेन कर्तव्यों विषय को प्रश्नांकित करने वाला है इसलिए इन परिवाद प्रकरणों में तृतीय पक्षकार के तौर पर जनहित का पक्ष भी रखे जाने की अपेक्षा है जिसके लिए पहल करूंगा।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


