रायपुर। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मची भीषण तबाही के बीच रायपुर के पांच यात्रियों की जान महज एक संयोग से बच गई। काठमांडू से करीब 50 किलोमीटर पहले त्रिशूली नदी के पास मलखू क्षेत्र में चाय पीने के लिए रुके यात्रियों को इसी दौरान पता चला कि आगे का रास्ता बाढ़ और भूस्खलन के कारण बंद हो चुका है। समय रहते आगे बढ़ने का फैसला टालने से पांचों संभावित बड़े हादसे की चपेट में आने से बच गए।
रायपुर के दिनेश ओझा, प्रेमसिंह जगत, नारायण सेन, चतेंद्र प्रकाशी और दिनेश सिंह ठाकुर 21 अगस्त को नेपाल के लिए रवाना हुए थे। नेपाल बॉर्डर के सिरोली से निजी कार से उन्होंने यात्रा शुरू की थी। पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के बाद पांचों काठमांडू की ओर जा रहे थे। इसी दौरान मलखू क्षेत्र में उन्होंने चाय पीने के लिए कार रोक दी।
चाय पीते समय मिली रास्ता बंद होने की जानकारी
चाय पीने के दौरान यात्रियों को जानकारी मिली कि अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण आगे वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। इसके बाद उन्होंने त्रिशूली नदी का विकराल रूप देखा और आगे जाने का फैसला पूरी तरह टाल दिया।
यात्रियों का कहना है कि अगर वे उस समय चाय पीने के लिए नहीं रुकते और आगे बढ़ जाते, तो गंभीर हादसे की चपेट में आने का खतरा था।
24 घंटे कार में गुजारी रात, बिजली-पानी भी रहा बंद
रास्ता बंद होने के कारण पांचों यात्री करीब 24 घंटे तक मलखू क्षेत्र में फंसे रहे। उनके साथ सैकड़ों अन्य यात्री भी वहां फंसे हुए थे। रात उन्होंने अपनी कार में ही गुजारी। इस दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी।
लोग लगातार बाहर निकलकर हालात का जायजा लेते रहे और रास्ता खुलने की जानकारी लेते रहे। क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के कारण स्थिति बेहद भयावह बनी हुई थी।
आंखों के सामने दिखी तबाही
दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि आसपास का माहौल बेहद डरावना था। बाढ़ और भूस्खलन के कारण मकान, पुल-पुलिया, पुलिस चौकियां और गांव तक प्रभावित हुए। त्रिशूली नदी के तेज बहाव में वाहन और शव बहते हुए दिखाई दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि नेपाल में हुई तबाही का मंजर देखकर सभी यात्री सहम गए थे। नदी के तेज बहाव में वाहन, मवेशी, मलबा और शव बहते दिखाई दे रहे थे। कई पुल और मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि बिजली और पानी की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई थी।
बोले- भगवान पशुपतिनाथ की कृपा से सुरक्षित हैं
दिनेश सिंह ठाकुर ने कहा कि भगवान पशुपतिनाथ की कृपा रही, इसलिए पांचों यात्री सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में उन्होंने अपनी आंखों से जो तबाही देखी, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
सभी यात्रियों ने आपदा में फंसे लोगों की सुरक्षित घर वापसी की प्रार्थना की। हालात में सुधार के बाद पांचों ने नेपाल से वापसी शुरू कर दी है। वे दुर्ग-नौतनवा ट्रेन से रायपुर लौट रहे हैं और शनिवार सुबह करीब 10 से 11 बजे तक रायपुर पहुंचने की उम्मीद है।


