जब मुख्यमंत्री श्री साय ने थामा हाथ, तो दिव्यांग हितग्राही की जिंदगी में लौटी उम्मीद की रौशनी

सुशासन तिहार के समाधान शिविर में मिली बैटरी चलित ट्रायसायकल, संघर्ष भरी जिंदगी को मिला नया सहारा

जिंदगी कभी-कभी इंसान की परीक्षा इतनी कठिन लेती है कि हर दिन एक संघर्ष बन जाता है। दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत करंजा-भिलाई, वार्ड क्रमांक 16 निवासी तोपसिंग साहू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिवार का सहारा बनने के लिए एक छोटे से पान ठेले का संचालन करते रहे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी परेशानी थी रोज दुकान तक पहुंचना।

चलने-फिरने में असमर्थ श्री साहू को हर दिन दूसरों की मदद का इंतजार करना पड़ता था। कई बार समय पर दुकान नहीं पहुंच पाने से आमदनी प्रभावित होती थी। शरीर की तकलीफ से ज्यादा उन्हें इस बात का दर्द था कि वे अपनी मेहनत के बावजूद आत्मनिर्भर नहीं बन पा रहे थे।इसी बीच उन्हें समाज कल्याण विभाग की उस योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। उम्मीद की एक नई किरण लेकर उन्होंने समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया।

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