जनहित में महत्वपूर्ण जानकारी विधानसभा प्रश्नोत्तरी का जवाब मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने दिया।
निजी अस्पतालों में जन्म का पंजीकरण कराना अब केवल औपचारिकता नहीं, कानूनी दायित्व भी है।
चिकित्सा व्यवसाय करने वाले की जिम्मेदारी को पुनः एक बार विधानसभा प्रश्नोत्तरी में स्पष्ट किया गया ।
निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम एवं अन्य निजी चिकित्सा संस्थानों के संचालकों की जिम्मेदारी तय हुई ।
नया रायपुर, 16 जुलाई 2026 छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक ललित चंद्राकर के प्रश्न क्रमांक 50 (क्र. 851) के उत्तर में वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य में निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम एवं अन्य निजी चिकित्सा संस्थानों के संचालकों पर जन्म की सूचना निर्धारित समयावधि में संबंधित रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। उल्लेखनीय है निजी चिकित्सा व्यवसाई जन्म प्रमाण पत्र संबंधित कार्यवाही हेतु जो जानकारी देते है । उनमें कई विसंगतियां होती है । यह भी देखने में आया है कि कई लोग निजी चिकित्सा व्यवसाई से मिलकर फर्जी तरीके से जन्म प्रमाण पत्र बनवा लेते है। विशेषकर ऐसा उन मामलों में होता जहां व्यक्ति बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर लेता है और दूसरी पत्नी से जन्म लेने वाले बच्चे का फर्जी तरीके जाती प्रमाण पत्र बनवा लेता है । ऐसे मामलों के कार्यवाही प्रक्रिया में विधायक ललित चंद्राकर द्वारा पूछा गया प्रश्न विधिक प्रकाश डालने वाला साबित हो रहा है।
वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की कार्यवाही पर स्पष्टता कायम की है
विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (संशोधित 2023) तथा छत्तीसगढ़ राज्य जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2026 के तहत निजी चिकित्सा संस्थान निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम एवं अन्य निजी चिकित्सा संस्थानों के संचालकों को “सूचनादाता”घोषित किया गया है। जिनको उनके चिकित्सा संस्थान में होने वाले जन्म की सूचना देने की बढ़ता है । चिकित्सा व्यवसाय संचालक से जन्म की जानकारी प्राप्त होने के बाद संबंधित रजिस्ट्रार के अनुमोदन से जन्म प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।
ध्यान दीजिए क्या कहा है छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री ने?
✔️ निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम के संचालक जन्म की सूचना देना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करेंगे।
✔️ सूचना निर्धारित समयावधि में संबंधित रजिस्ट्रार को भेजी जाएगी।
✔️ सूचना नहीं देने की स्थिति में जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 23 के अंतर्गत प्रत्येक घटना पर ₹1000 की शास्ति का प्रावधान है।
नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण
यदि किसी निजी अस्पताल में शिशु का जन्म हुआ है, तो अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अस्पताल द्वारा जन्म की सूचना समय पर संबंधित प्राधिकारी को भेजी गई है, ताकि जन्म प्रमाण-पत्र बिना अनावश्यक विलंब के जारी हो सके। यह ध्यान देने वाला विषय है कि विधानसभा में दिए गए उत्तर में दायित्व मुख्यतः निजी चिकित्सा संस्थान के संचालक (सूचनादाता) का बताया गया है। उत्तर में चिकित्सक के विरुद्ध पृथक दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए यदि आपकी जानकारी में ऐसा मामला आए जिसमें फर्जी तरीके से जाती प्रमाण पत्र बनवाया गया है तो ऐसे मामले में चिकित्सा व्यवसाई को भी जवाबदार पक्षकार बनाकर उसकी शिकायत की जा सकती है ।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


