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Sunday, April 12, 2026
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स्कूल की पिटाई (क्या आपने कभी खाई है )

एक दिन चर्चा के दौरान मेरे बेटे ने मुझसे कहा – आपके समय के शिक्षक बहुत क्रूर होते थे और बहुत मारते भी थे पर सुना है, आप बहुत सीधे-साधे और पढ़ाई में अच्छे थे , क्या आपने भी कभी पिटाई खाई थी ?

वह मुझे बचपन में ले गया, जिस समय सीखी गई कई बातें जिन्दगी में हमेशा अपनी छाप बनाए रखती हैं। तब मैंने बताया- छठवी में एक शिक्षक हुआ करते थे श्री ट……या सर , गोरे चिट्टे-ऊँचे से लडके उन्हे दबी जुबान में सफेद हाथी कहा करते थे। वे भाषा पढाते थे. पूरे बच्चे उनके डंडे के नाम से कांपते थें।

वे कभी-कभी हमारी कक्षा भी लेते थे और उन्हे मैं सबसे ज्यादा प्रिय था। वे जब कक्षा के सामने से गुजरते थे तो यदि एक भी बच्चा जोर से हल्ला करते या बदमाशी करते दिख गया तब वे पूरी कक्षा को हाथ पर डंडे से मारते थे। यदि किसी ने विरोध जताया कि मेरी गलती नहीं है तो उसे अतिरिक्त एक डंडा और मारते थे। और पुराने बदमाश लड़को को भी एक डंडा अतिरिक्त मिलता था ( जिन्होने एक से ज्यादा बार बदमाशी की ) पहली बार मैने भी विरोध किया और अतिरिक्त डंडा खाया। अगली 4-5 बार चुपचाप आंखे झुकाकर मै एक डंडा खाने हाथ बढा दिया करता था। एक बार कक्षा के बाद अपने दोस्त दीपक सोनी से मैने पूछा कि तुमने आज सबको मार क्यों खिलाई, वह हंसते हुये बोला कक्षा के 2 लड़के हमें बहुत परेशान करते है और उनकी बदमाशी के कारण हमें बेवजह डंडे खाने पड़ते थे। आज मैंने उन्हें बेवजह पिटवाने के लिए जानबूझकर बदमाशी की, कल तुम भी करना ताकि उन्हें डबल दंड मिले।

उसी दिन किसी कार्य से मुझे ,सर के घर जाना पड़ा. मैं डरते-डरते अंदर गया तब उन्होने मुझे बहुत प्यार से बिठाया मेरे न कहने के बावजूद दूध पिलाया और अच्छी बातें करने लगे. तब हिम्मत करके मैंने उनसे पूछ लिया कि सर, आप इतने अच्छे हैं, फिर भी आप इस तरह से सजा क्यों देते हैं? वे बोले, बेटा, मै कुछ बातें सब बच्चो को सिखाना चाहता हूं जो कि पूरी जिन्दगी काम आयेगी।

1- आपको आपकी गलती की सजा जरूर मिल सकती है।
2- आपकी गलती की सजा आपके मित्र एवं प्रियजनों को भी मिल सकती है।
3- आप बेगुनाह है तब भी दूसरे की गलती की सजा आपको मिलने पर आपको चुपचाप सहना आना चाहिये।
4- आपका पूर्व का रिकार्ड, आपको, बिना गलती होने पर भी दुगुनी सजा दिलवा सकता है।

इन बातों ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी और समय समय पर मैं उन्हें याद कर अपने को समझाईश देता हूं। यह बात मैं अपने बेटे को बोल कर नहीं समझा पाता पर उसके व अन्य सभी लोगों के लिये लिख रहा हूं ताकि वे इसे बार-बार पढ़कर इसे आत्मसात कर लें और जीवन में कभी भी उपरोक्त चारों बातें मन को संयमित रखने के काम आ सकें।
इंजी. मधुर चितलांग्या
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स

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