जानें भारत के पहले रॉकेट के शानदार इतिहास और उसकी सफलता की कहानी

भारत का पहला रॉकेट “रोहिणी-1” था, जिसे 1963 में लॉन्च किया गया। हालांकि, यह रॉकेट पूरी तरह से भारतीय था या नहीं, इस पर कुछ विवाद है, क्योंकि यह रॉकेट एक सहयोगी प्रयास था। इस रॉकेट का प्रमुख उद्देश्य भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत करना और अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की स्थिति को मजबूत करना था।

इतिहास और विकास:

  • भारत का पहला रॉकेट: भारत का पहला रॉकेट एक थ्रस्टर था जिसे 1963 में थुम्बा (तिरुवनंतपुरम, केरल) से लॉन्च किया गया था। इसे “थुम्बा थ्रस्टर” भी कहा जाता है। यह रॉकेट छोटा था और इसने बॉडी सेंसर्स और परीक्षण उपकरण भेजे थे।
  • रोहिणी-1: भारत का पहला पूर्ण रॉकेट था, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया था। यह रॉकेट एक माइल स्टोन था क्योंकि इसके माध्यम से भारत ने अंतरिक्ष में अपनी पहचान बनानी शुरू की थी।
  • लॉन्च स्थल: इस रॉकेट को थुम्बा रेंज से लॉन्च किया गया था, जो तब एक प्रमुख अंतरिक्ष केंद्र था। इस रेंज का चुनाव इसके समीपस्थ समुद्र की उपस्थिति और कम आबादी वाले क्षेत्रों के कारण किया गया था।

तकनीकी विवरण:

  • रॉकेट की लंबाई लगभग 7 मीटर थी।
  • यह रॉकेट सॉलिड प्रोपेलेंट से चलता था और इसकी गति लगभग 2 किलोमीटर प्रति सेकंड थी।

महत्व:

  • यह रॉकेट भारत को अंतरिक्ष युग में प्रवेश करने की दिशा में पहला कदम साबित हुआ।
  • इसके साथ ही, भारत ने अपनी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास शुरू किया, जो बाद में अंतरिक्ष यात्राओं, उपग्रहों और संचार प्रणालियों में परिणत हुआ।

इस रॉकेट के सफल लॉन्च के बाद भारत ने कई अन्य रॉकेट लॉन्च किए और धीरे-धीरे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल की।

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