रूस पर कड़े प्रतिबंध, यूरेनियम पर राहत: अमेरिका के दोहरे रुख की पूरी कहानी

अमेरिका और रूस के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी संसद ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पारित किया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पारित इस बिल के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा, जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखते हैं या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

हालांकि, रूस पर प्रस्तावित कड़े प्रतिबंधों के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए कुछ महत्वपूर्ण छूट का प्रावधान भी रखा गया है। बिल में रूस से यूरेनियम आयात से जुड़े मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने का प्रावधान है, लेकिन अमेरिका-रूस नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों तथा परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले कम-संवर्धित यूरेनियम के कुछ आयातों को इससे बाहर रखा गया है।

परमाणु क्षेत्र में रूस पर निर्भरता

बिल में मौजूद छूट की वजह अमेरिका की परमाणु ईंधन आपूर्ति में रूस की भूमिका से जुड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिकी सिविल न्यूक्लियर ऑपरेटरों को 12.71 मिलियन SWU की संवर्धन सेवाएं मिलीं, जिसमें रूस की हिस्सेदारी 3.284 मिलियन SWU यानी करीब 26 प्रतिशत थी। अमेरिका में घरेलू संवर्धन की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत रही, जबकि फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड ने भी सेवाएं दीं।

अमेरिका रूस पर अपनी परमाणु ईंधन निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। मई 2024 में वॉशिंगटन ने रूसी यूरेनियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया था और कंपनियों को 1 जनवरी 2028 तक छूट मांगने की अनुमति दी थी। इसके साथ अमेरिकी परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए 2.72 अरब डॉलर की फंडिंग भी की गई थी।

रूसी तेल-गैस खरीदारों पर भी निशाना

प्रस्तावित कानून में रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, बड़े उद्योगपतियों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘शैडो फ्लीट’ टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है। सीनेट की विदेश संबंध समिति के अनुसार, कानून का उद्देश्य रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों को यूक्रेन में मॉस्को के युद्ध के समर्थन के लिए जवाबदेह ठहराना है।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बिल को 262-159 वोटों से पारित किया, जबकि सीनेट ने इसे 86-11 वोटों से मंजूरी दी। इसके बाद बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए जाएगा।

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