बॉलीवुड के सबसे ऊर्जावान, वर्सेटाइल और बेबाक सुपरस्टार रणवीर सिंह का करियर कभी भी एक सीधी, आसान लकीर पर नहीं चला। उनके सफर में ऐसे साल भी आए जब उन्होंने जिस फिल्म को छुआ वह सोना बन गई, और ऐसा दौर भी आया जब हर शुक्रवार उनकी काबिलियत और भविष्य पर नए सवाल खड़े करता दिखा। लेकिन इन तमाम उतार-चढ़ावों के बीच अगर कोई एक चीज़ चट्टान की तरह अडिग रही, तो वह है रणवीर की कभी न हार मानने वाली ज़िद और आगे बढ़ते रहने का उनका कभी न खत्म होने वाला जज़्बा।
आज जब रणवीर सिंह अपना 41वां जन्मदिन मना रहे हैं, तो उनका यह प्रोफेशनल सफर फिल्म इंडस्ट्री के उस कड़वे और सुनहरे सच को दिखाता है जहां किस्मत पलक झपकते ही बदल जाती है। यह कहानी शुरुआती रिजेक्शन, ब्लॉकबस्टर कामयाबी, आलोचनाओं के दौर और हाल ही में आई फिल्म ‘धुरंधर’ के जरिए हुई उनकी उस महा-वापसी की है, जिसने पूरी इंडस्ट्री को फिर से उनका लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है।
आज, रणवीर सिंह के लिए किसी बड़ी फिल्म को पाने के लिए संघर्ष करने की कल्पना करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन एक समय यही उनकी सच्चाई थी। ‘कॉफ़ी विद करण’ सीज़न 7 के पहले एपिसोड में, एक्टर ने ‘बॉम्बे वेलवेट’ फिल्म हाथ से निकल जाने के बारे में बात की, जो उस समय की सबसे महत्वाकांक्षी हिंदी फिल्मों में से एक थी, लेकिन बन नहीं पाई। यह प्रोजेक्ट आखिरकार रणबीर कपूर के पास चला गया, लेकिन रणवीर ने बताया कि शुरू में वे भी इसकी दौड़ में शामिल थे।


