26 जून से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र का आरंभ, सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग

पंचांग की गणना के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा पर 26 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। इस बार देवी आराधना का पर्वकाल पूरे नौ दिन का रहेगा।
धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार, जब नवरात्र पूर्ण हो तथा किसी भी तिथि का कोई क्षय नहीं, तो यह विशेष बलशाली व प्रभावकारी मानी जाती है। विशिष्ट योगों की साक्षी से इसकी शुभत और बढ़ जाती है। इस बार नवरात्र में साधना,आराधना की दृष्टि से महत्वपूर्ण रवि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है।

एक साल में मनाए जाते हैं चार नवरात्र
महाकाल की नगरी उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया, श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार देवी दुर्गा की साधना आराधना के लिए वर्ष भर में चार नवरात्र माने गए हैं। इनमें दो गुप्त तथा प्राकट्य नवरात्र हैं।
चैत्र व अश्विन के नवरात्र को प्राकट्य तथा माघ व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहा जाता है। देवी की आराधना के लिए चारों नवरात्र विशेष हैं। गुप्त नवरात्र में तंत्र,मंत्र व यंत्र की सिद्धि के लिए साधक गुप्त आराधना करते हैं।
उज्जैन आदि अनादि काल से शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां शक्तिपीठ हरसिद्धि, सिद्धपीठ गढ़कालिका, चौसठ योगिनी, नगरकोट माता, भूखी माता, चामुंडा माता सहित अन्य प्राचीन देवी मंदिर हैं।

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