क्या विभागीय पारदर्शिता तेल लेने गाई है ?
विश्वसनीयता विभागीय कचरे के डिब्बे में क्यों है ?
अनियमितताओं को सर्वोच्च स्थान क्यों दिया गया है ?
पूरब टाइम्स , भिलाई दुर्ग . पिछले दिनों हमने जल संसाधन विभाग के दुर्ग वृत्त व दुर्ग संभाग की कार्यशैली में अपारदर्शिता व मनमानी के बारे में खबर छापकर , प्रमुख अभियंता को संज्ञान करवाया था . जिसमें हमने सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछली कांग्रेस की सरकार में इस विभाग द्वारा पाटन क्षेत्र में प्रशासकीय प्रतिवेदन तथा अनेक श्रम नियमों को ताक में रखकर , काम व खर्च कराये जाने का उल्लेख किया था . प्रमुख अभियंता कार्यालय ने इस मामले को गम्भीरता से लेकर मुख्य अभियंता को जांच कर , हमें वस्तु स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिये हैं . ऐसा लगता है दुर्ग में स्थित कार्यालय की इस जोड़ी ने अपारदर्शिता के सभी रिकॉर्ड तोड़ने का निश्चय कर लिया है जोकि सूचना के अधिकार में दी गई अपूर्ण व गैर ज़िम्मेदाराना जानकारी से परिलक्षित होता है . जैसे कार्य शुरू होने के पूर्व बनाये गये प्रशासकीय प्रतिवेदन का दुर्ग संभाग में ना होना , जबकि अन्य संभाग के कार्यपालन अभियंता के पास उनके चलित कार्यों के प्रशासकीय प्रतिवेदन उपलब्ध हैं . उसी प्रकार से अनेक नोटिस व श्रम विभाग के द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में अधीक्षण अभियंता द्वारा, बिना जल संसाधन विभाग की श्रम कानून से संबंधित नियमावली को पढ़े , खारिज करना , अपने आप में दबंगाई का एक उदाहरण बनता है . उल्लेखनीय है कि ये अधिकारी गण , लोगों के द्वारा पिछली कांग्रेस सरकार के समय में पाटन में नियमों को ताक में रखकर काम कराने वाले कहलाते हैं हांलाकि यह जांच का विषय है और पूरब टाइम्स इस मामले को उच्च स्तर पर उठा भी रहा है . इसी कड़ी में पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट ..
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता शिवनाथ मंडल दुर्ग को गड़बड़ीबाज कहना उचित होगा क्या ?
विगत दिनों से सिंचाई विभाग की गड़बड़ियों को उजागर कर किसानों का सर्वांगीण विकास का प्रयास करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जल संसाधन विभाग के दुर्ग संभाग से संबंधित अनियमितताओं को प्रश्नांकित कर विभागीय कार्यवाहियों के साथ-साथ जांच एजेंसियों के संज्ञान में लाने की नागरिक जिम्मेदारी पूरी कर रहें हैं। उल्लेखनीय है कि, जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के सचिव एवं प्रमुख अभियंता भी सिंचाई विभाग के दुर्ग संभाग की गड़बड़ियों पर संज्ञान लेकर कार्यवाही किए जाने का निर्णय लेकर पत्र व्यवहार कर रहें हैं लेकिन अधीक्षण अभियंता शिवनाथ वृत्त दुर्ग अपना पदेन कर्तव्य पूरा कर जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ का हित सुनिश्चित करवाने की मंशा से कार्य करते नजर नहीं आ रहा हैं . जिसका कारण क्या है यह आगामी दिनों में विभागीय जांच में स्पष्ट हो जायेगा।
कार्यपालन अभियंता सिंचाई संभाग दुर्ग का कार्य व्यवहार ठेकदार हित को सर्वोच्च महत्व देकर शासन हित को अनियमितताओं के हवाले करने का अद्वितीय उदाहरण है , यह कहे जाने में दो मत हैं क्या ?
किसी भी निर्माण परियोजना में कार्यपालन अभियंता और ठेकेदार के मध्य निर्माण कार्यों के प्रत्येक विषय पर सीधे संवाद और लिखा पढ़ी की जाती है इसलिए विभागीय निर्माण कार्यों में होने वाली अनियमितताओं और शासकीय नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में कार्यपालन अभियंता को आरोपी बनाया जाता है. गौरतलब रहे कि, सिंचाई विभाग के दुर्ग संभाग द्वारा करवाए जा रहे निर्माण कार्य की गड़बड़ियों को उजागर करने के बाद कार्यपालन अभियंता को प्रावधानुसार प्रश्नांकित किया जा रहा है लेकिन कार्यपालन अभियंता की प्रतिक्रिया विहिन स्थिति कई शंकास्पद इशारे कर रहीं है । जिसका मतलब क्या है , जनता समझती है।
जल संसाधन विभाग के पाटन विफलनामा पर स्थानीय विधायक भूपेश बघेल की राजनीतिक चुप्पी के पीछे छुपी क्या वाकई किसानों के लिए हितकारी है ?
वैसे तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार को प्रदेश ने नकार दिया और विगत विधानसभा चुनावों में विपक्ष में बैठने के लिए जनादेश दिया लेकिन पाटन विधानसभा क्षेत्र ने कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल को जीता दिया क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में पाटन क्षेत्र को बड़ी संख्या में मध्यम और विस्तारित सिंचाई परियोजना दिलवाई थी तथा छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के बजट में से उल्लेखनीय राशि का आवंटन करवाकर पाटन में खर्च किए जाने के लिए विभागीय प्रशासकीय स्वीकृति हासिल की थी लेकिन स्थानीय किसानों की जानकारी में जब यह आया कि उनका विधायक भूपेश बघेल पाटन की सिंचाई परियोजना को विभागीय अनियमितताओं के हवाले करके “चुप्पू-चुप्पू बैठने वाली राजनीतिक समझदारी” दिखा रहा है तो पाटन विधानसभा क्षेत्र के किसानों को अपनी गलती का अहसास होने लगा है . जिसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में देखा जाना स्वाभाविक है !
सिंचाई विभाग के कार्यों से पाटन विधानसभा क्षेत्र को होने वाले नफ़ा-नुकसान के आधार पर समीक्षा किया जाना अपेक्षित है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को स्थानीय किसानों ने क्यों जिताया था और प्रदेश के किसानों ने विगत कांग्रेस की सरकार को क्यों विधानसभा से बाहर निकाल दिया यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण राजनीतिक समीक्षा का पैमाना है . पाटन में नियमानुसार कार्य हुए या नहीं , अब वर्तमान सरकार को सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता से भी स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए!
अमोल मालुसरे ,सामाजिक कार्यकर्ता


