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Tuesday, February 17, 2026
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गंभीर आरोप : अधीक्षण अभियंता शिवनाथ मंडल दुर्ग एस.के.पाण्डेय के झूठे अभिकथन को चुनौती दी गई

पूरब टाइम्स , भिलाई रायपुर . यह कहा जाता है कि यदि किसी के लगातार कुकृत्यों की किसी को लगातार सज़ा नहीं मिलती है तो वह अपने को महाबली मानने लगता है . ऐसा ही है जल संसाधन विभाग के अनेक ठेकेदारों व अधिकारियों का हाल . पूर्व में भी पूरब टाइम्स ने अनेक मामले उठाये थे , जिसमें एक था , कार्य समाप्ति के पूर्व ठेकेदार को उसकी सुरक्षा निधि का एफडीआर वापस करने का , इस पर विभाग द्वारा कार्यपालन यंत्री पर एफआईआर कराया गया था परंतु ठेकेदार पर कार्यवाही नहीं की गई थी . अब विभाग ने ठेकेदार पर कार्यवाही की अनुशंसा कर दी गई है .एक अन्य मामले में,  प्रमुख अभियंता द्वारा की गई लीपापोती के मामले में जल संसाधन विभाग के सचिव को लोकायुक्त का ज़मानती वारंट ज़ारी हुआ है . इसी प्रकार ऐसा लगता है,  दुर्ग वृत्त के अधीक्षण अभियंता एस. के. पाण्डेय भी विभागीय कारयों में अपारदर्शिता रख व मनमाने जवाब देकर अपने आप को महाबली मानने लगे हैं . केवल इतना ही नहीं वे अपने मातहतों के भी इसी तरह का कार्य व्यवहार को अपनी आंखें बंद कर , अपनी स्वीकृत प्रदान करने लगे हैं . शायद वे भूल गये कि उनके उच्चाधिकारियों व कानून के हिसाब से अनेक नियमों के कारण , उनकी भी जवाबदेही बनती है . अब कुछ समाज सेवकों के द्वारा उनकी कार्यशैली को चुनौति के कारण , उन्हें श्रम विभाग , राजस्व विभाग तथा उच्चाधिकारियों द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति के विरुद्ध किये गये कार्यों पर किये जाने वाले सवालों के जवाब देने होंगे . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ….

बीएनएस अध्याय 14 झूठे साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराध को परिभाषित करता है जिसमें मिथ्या साक्ष्य देना, झूठे साक्ष्य गढ़ना, झूठे साक्ष्य के लिए दण्ड, ऐसे साक्ष्य का उपयोग करना जो मिथ्या हो, ऐसे प्रमाण पत्र को सत्य मानकर प्रयोग करना जो मिथ्या हो, घोषणा में दिया गया मिथ्या कथन जो विधि द्वारा साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, किसी घोषणा को मिथ्या जानते हुए भी उसे सत्य के रूप में प्रयोग करना, सूचना देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की सूचना देने में जानबूझकर चूक करना जैसे गंभीर अपराध को परिभाषित किया गया है । जिनके तहत अधीक्षण अभियंता शिवनाथ मंडल दुर्ग एस.के.पाण्डेय के झूठे अभिकथन को चुनौती दिए जाने के उपरांत विधि अपेक्षित कार्यवाही कार्यान्वित होने की दिशा में बढ़ सकती है ।

गौरतलब रहे कि जिन श्रम कानून की अवमानना का आरोप लगाया गया है वे हैं मजदूरी संदाय अधिनियम 1936, साप्ताहिक अवकाश दिन अधिनियम 1948, न्यूनतम मजदुरी अधिनियम 1948, बोनस संदाय अधिनियम 1965, ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम 1970, सामान पारिश्रमिक अधिनियम 1976, अंतरराजकीय प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा शर्त) अधिनियम 1979, बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986, भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्त नियोजन) अधिनियम 1996 उल्लेखनीय है कि, इन सभी कानूनों का आधार श्रम विवरणी होता है जिसको प्रावधानुसार रखने की सुनिश्चितता करने का पदेन कर्तव्य एस.के.पाण्डेय अधीक्षण अभियंता द्वारा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया गया है ।

शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीक्षण अभियंता शिवनाथ मंडल दुर्ग एस.के.पाण्डेय के झूठे अभिकथन किए जाने का आरोप लगाया गया है । जिसकी जांच कार्यवाही में स्पष्ट हो जायेगा कि वस्तुस्थिति क्या है परंतु तर्कसंगत यह भी है कि सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग इस मामले में जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ जिसकी शिकायत मामले का प्रधान नियोक्ता की भूमिका है इसी तौर पर नियोजित श्रमिकों के श्रम अधिकार में जो विधि अपेक्षित कार्यवाही कर रहें है उसके साथ – साथ इस बात पर भी संज्ञान ले की अधीक्षण अभियंता की प्रशासकीय मंशा क्या है क्योंकि अगर अधीक्षण अभियंता अपने पदेन प्राधिकार का दुरुपयोग कर दोषी ठेकदारों को बचाना चाहता है तो इस गंभीर परिस्थिति के विरुद्ध भी कार्यवाही किया जाना विधि अपेक्षित है

अधीक्षण अभियंता शिवनाथ मंडल दुर्ग एस.के.पाण्डेय के द्वारा  सहायक आयुक्त दुर्ग महोदय के समक्ष प्रस्तुत की गई विसंगतिपूर्ण एवं झूठे तथा तथ्य-विहीन अभिकथनों वाली प्रतिक्रिया की जानकारी देकर भ्रमित एवं गुमराह करने विषयक कारित किये गए प्रशासकीय अपराध का संज्ञान करवाने एवं श्रम विधि अनुसार दंडात्मक कार्यवाही करने हेतु मेरे द्वारा लिखित शिकायत की गई है ।

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