असाधारण जज़्बे के साथ झारखंड की पहलवान पूनम ने करियर खत्म कर देने वाली चोट से पार पाते हुए 9 साल के खिताबी सूखे को किया समाप्त

–कुश्ती शुरू करने के कुछ समय बाद ही पूनम का कंधा उतर गया था और फिर उन्हें एक साल तक मैट से दूर रहना पड़ा
-गेम्स शुरू होने से ठीक पहले उनके कंधे में फिर से परेशानी होने लगी थी, लेकिन इस बार उन्होंने दर्द को मात देकर गोल्ड मेडल जीता

रायपुर। कुश्ती जैसे खेल में जहां फिटनेस और ताकत सबसे बड़ी जरूरत होती है, वहां चोटिल कंधे के साथ मैट पर उतरना अपने आप में बड़ा जोखिम है। लेकिन झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने इस जोखिम को चुनौती में बदला और दर्द के बावजूद मुकाबले दर मुकाबले जीत हासिल करते हुए पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

फाइनल में भी पूनम बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के साथ दर्द साफ नजर आ रहा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अंत तक लड़ते हुए मुकाबला अपने पक्ष में किया। पूनम ने महिलाओं की 50 किग्रा वर्ग के फाइनल में तेलंगाना की के. गीता को हराकर स्वर्ण पदक जीता।

अपने करियर का पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूनम ने साई मीडिया से कहा, “हार कैसे मान लेती सर? जब नौ साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मान लेती। मेरी यह चोट बहुत पुरानी है। छह साल पहले मेरा कंधा उतर गया था। बीच में ठीक हुआ, लेकिन फिर ट्रेनिंग के दौरान दोबारा चोट लग गई। इसके बावजूद मैंने वापसी की और अब मैंने यहां पर गोल्ड जीता है।” उन्होंने कहा,”अपने करियर की शुरुआत से ही मैं चोटों से जूझ रही हूँ, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। गोल्ड मेडल जीतना किसी सपने के सच होने जैसा लगता है। नौ साल तक गोल्ड न जीत पाने के दर्द के मुकाबले यह चोट कुछ भी नहीं है।’

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