लैलूंगा की पहचान बना ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल

देशभर में बढ़ रही मांग, बेंगलुरु से कारगिल तक पहुंच रहा सुगंधित चावल
-प्राकृतिक खेती और बेहतर विपणन से किसानों को मिल रहा लाभ
-राज्य सरकार की किसान हितैषी नीति और फैसलों से किसानों में उत्साह का माहौल
-लैलूंगा में जंवाफूल की खेती 700 एकड़ से बढ़ाकर 2000 एकड़ तक करने का लक्ष्य

रायगढ़. जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है।

प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री राम विचार नेताम के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों का आय दुगुनी करने निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने में जनहितकारी नीति बनाने के साथ ही किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं इनमें कृषि उन्नति योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसे योजना शामिल है। इससे प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।

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