अनोखी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर गुजरात का रहस्यमयी कालो डूंगर

गुजरात के कच्छ का रण अपनी सफेद नमक की चादर और अनोखी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन इसी विशाल सफेद रेगिस्तान के बीच एक ऐसी काली पहाड़ी भी मौजूद है, जो अपने रहस्यमयी किस्सों और अद्भुत नजारों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। इस पहाड़ी का नाम कालो डूंगर है।

यहां मौजूद एक सड़क को लेकर दावा किया जाता है कि इस पर न्यूट्रल गियर में खड़ी गाड़ियां ढलान के विपरीत दिशा में अपने-आप चलने लगती हैं। आखिर इस रहस्य के पीछे क्या सच है? आइए जानते हैं।

कच्छ का सबसे ऊंचा स्थान है कालो डूंगर

गुजरात के खावड़ा गांव के उत्तर में स्थित कालो डूंगर को कच्छ का सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है। यह पहाड़ी लगभग 462 मीटर (करीब 1,516 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से सफेद रण का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बेहद आकर्षक लगता है।

400 साल पुराने दत्तात्रेय मंदिर से जुड़ी है मान्यता

कालो डूंगर पर स्थित भगवान दत्तात्रेय को समर्पित लगभग 400 वर्ष पुराना मंदिर यहां की सबसे बड़ी पहचान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान दत्तात्रेय पृथ्वी भ्रमण पर निकले थे, तब वे इस स्थान पर रुके। कहा जाता है कि यहां उन्होंने भूखे गीदड़ों को भोजन कराने के लिए अपना शरीर अर्पित कर दिया था। इसी कथा के सम्मान में आज भी मंदिर में प्रतिदिन गीदड़ों के लिए भोजन रखा जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

क्या सच में उल्टी दिशा में चलती हैं गाड़ियां?

कालो डूंगर की सबसे चर्चित बात यहां की मैग्नेटिक रोड या ग्रैविटी हिल है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों का दावा है कि सड़क के एक खास हिस्से पर यदि गाड़ी को न्यूट्रल गियर में छोड़ दिया जाए, तो वह ढलान के विपरीत दिशा में चलने लगती है। यही रहस्य हर साल हजारों पर्यटकों को यहां खींच लाता है।

क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

हालांकि, वैज्ञानिकों के अनुसार यह किसी चुंबकीय शक्ति (Magnetic Force) का असर नहीं है। Indian Institute of Technology Kanpur के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया कि यह घटना ऑप्टिकल इल्यूजन यानी आंखों का भ्रम है। दरअसल, आसपास की पहाड़ियां, क्षितिज और सड़क का ढलान ऐसा दृश्य बनाते हैं कि जो रास्ता वास्तव में नीचे की ओर होता है, वह देखने में ऊपर की ओर जाता हुआ महसूस होता है। इसी भ्रम की वजह से ऐसा लगता है कि वाहन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में चल रहे हैं, जबकि वास्तव में वे सामान्य ढलान पर ही आगे बढ़ रहे होते हैं।

पर्यटकों के लिए क्यों है खास?

कच्छ का सबसे ऊंचा व्यू पॉइंट
सफेद रण का शानदार पैनोरमिक नजारा
400 साल पुराना दत्तात्रेय मंदिर
रहस्यमयी ग्रैविटी हिल का अनुभव
सूर्यास्त और फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन जगह।

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