व्यंग : अपने को बुद्धिजीवी साबित करने , आपको हमारी टिप्पणियाँ भी पढ़नी होगी !

मैंने पत्रकार माधो से कहा कि मुझे लगता है कि इन टीवी वालों से चर्चा करके ही किसी भी पार्टी को गठबंधन करना चाहिए , प्रचार -प्रसार , यहां तक कि विवादास्पद बयान भी उन्हीं की सलाह पर करना चाहिए. आप भी इस चुनाव परिमाण के बारे में अपने कोई एक्सपर्ट कमेंट देंगे क्या ? वे हँसते हुए बोले , अच्छा हुआ तुमने पूछ लिया . वरना जीभ की खुजली मिटाना बहुत मुश्किल हो जाता था . इन चुनाव के परिणाम जो आये उनपर तो सभी बातचीत कर रही हैं परन्तु मैं आपको यह बताना चाहूँगा कि इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

1. आम जनता को समझ लेना चाहिये कि चुनाव के समय नेतागण जो भी घोषणा करें , वे चुनावी वायदे होते हैं वर्ना आज तक आपके एकाउंट में 15-15 लाख आ गये होते . कश्मीर नेशनल कांग्रेस ने भी धारा 370 को वापस लागू करने की बात कही है जोकि विधानसभा के क्षेत्राधिकार में नहीं है .
2. जिस पार्टी के जीतने की संभावना कम होती है वह अनाप शनाप वादे करती है जिसे पूरा कर पाना किसी के लिये भी संभव नहीं होता है . जैसे – पकिस्तान से चर्चा की बात करने वाली महबूबा मुफ्ती की पार्टी .
3. जब कोई पार्टी उफान की तरफ होती है तब उसपर गठबंधन के लिये ज़्यादा शर्ते नहीं थोपना चाहिए . उन्हें नुकसान हो या ना हो , आपका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है . जैसा कि हरियाणा विकास कांग्रेस के साथ हुआ .
4. सामान्यतः गठबंधन से लाभ ही होता है . आपका सीटों में भी लाभ होता है और कम संसाधन में भी काम अच्छे से निपटता है . कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से युति नहीं की और हरियाणा में सरकार बनाने का अवसर खो दिया.
अब पत्रकार माधो मुझसे बोले, तुम भी लगे हाथ अपनी विशेषज्ञता झाड़ लो, मन हल्का हो जाएगा . मैंने कहा ,
1. बीजेपी की पास नरेंद्र मोदी नाम का ऐसा ट्रम्प का इक्का है जो कहीं भी , कोई भी , बाज़ी जितवा देता है . वरना इन विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी की ‘ कुकड़ू कू ‘ हो सकती थी .
2. यहां छ.ग. के स्थानीय निकाय के चुनाव में कांग्रेस अपनी गुटबाज़ी के चलते खुद की ‘ कुकड़ू कू’ करवाएगी .

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