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Thursday, May 21, 2026
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व्यंग : उसके गुरु, मेरे गुरु से, ज़्यादा पॉपुलर कैसे ?

मैंने , यह बात, पत्रकार माधो को बताई तो वे बोले , मैं आपको मशहूर संगीतकार एआर रहमान के जीवन की एक रोचक और महत्वपूर्ण कथा सुनाता हूं। वह 22 वर्षों तक हिंदू थे। एक दिन उनकी बहन बीमार पड़ी। उनके एक दोस्त ने उनकी बीमार बहन के लिए मस्जिद में दुआ मांगी। दुआ कबूल हुई। बहन ठीक हो गई . एक सूफी थे जो उनके कैंसर से जूझ रहे पिता के आखिरी दिनों में उनका इलाज कर रहे थे. जब एआर रहमान अपने परिवार के साथ कुछ सालों बाद फिर से सूफी से फिर मिले , तो उनकी बातों से एआर रहमान इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने दूसरा धर्म अपनाने का फैसला कर लिया. पूरे परिवार ने इस्लाम कबूल कर लिया। यह धर्म और आस्था परिवर्तन से ज्यादा इच्छाओं के पूरा होने का वाकया है।

लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ईश्वर की भक्ति करते हैं। आदमी जो सोचता है, वह होता नहीं है और ईश्वर जो सोचता है, वही होता है। मनुष्य इसलिए ईश्वर के समीप जाता है, ताकि वह ईश्वर की भक्ति करके अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सके। सवाल यह नहीं है कि लोगों को साईं की पूजा करनी चाहिए अथवा नहीं। बल्कि मूल प्रश्न है कि लोगों को ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए अथवा नहीं। जिन लोगों की इच्छाओं की पूर्ति एक सिद्ध गुरु से नहीं हुई, वे साईं के पास जाएंगे ही और जिनकी इच्छाएं एक देव पूरी नहीं कर पाएंगे, वे महादेव के पास जाएंगे ही। लोगों को , इच्छाओं को पूरा करनेवाले, पूजनीय चाहिए। आम लोगों की इच्छाएं होती भी क्या हैं? बेरोजगारी है, तो रोजगार मिल जाए। बीमारी है, तो बीमारी दूर हो जाए। गरीबी हो तो धन मिल जाए । जीवन सुखी और सुरक्षित हो। सबसे पहले वे जीवित व्यक्ति के पास जाते हैं । जब गुरु , राजनेता या ईष्ट , जन-आकांक्षाओं को पूरा नहीं करते, तो लोग निराश होकर ईश्वर के शरण में अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए जाते हैं। ईश्वर सबसे बड़ी सरकार है। सबसे बड़ा दरबार है।

मैंने तुरंत सवाल दाग दिया , उन लोगों का क्या जो निष्काम भक्ति करते हैं ? जो लोग प्रभु से सचमुच प्रेम करते हैं ? वे हँसते हुए बोले , वे इस तरह के विवाद को कोई तवज्जो नहीं देते हैं क्योंकि उनकी श्रद्धा अपने ईष्ट पर अटूट होती है । अपने दोस्त को मैसेज दे दो कि राजनीति में पर-निंदा से वोट और अनुयायी बढ़ सकते हैं परन्तु आस्था नहीं बढ़ सकती । फिर आकाश की तरफ देखते हुए बोले , सबका मालिक एक है ।

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