लोग कहते हैं कि राजनीति में ‘साम, दाम, दंड, भेद’ चलता है, लेकिन अंबानी जी ने नया फॉर्मूला निकाला है— ‘रिलायंस, रिफाइनरी, रिलायबिलिटी और ट्रंप की झप्पी’। अमेरिका ने 50 साल से एक भी रिफाइनरी नहीं बनाई थी। शायद वो अंबानी जी के ‘वेलकम ऑफर’ का इंतज़ार कर रहे थे। ट्रंप को भी समझ आ गया कि अगर अमेरिका को ‘ग्रेट’ बनाना है, तो जामनगर वाली स्टाइल में ही सोचना पड़ेगा। एक तरफ मोदी जी की ‘सख्त’ कार्यशैली और दूसरी तरफ ट्रंप की ‘जिद्दी’ पर्सनैलिटी। अंबानी जी इन दोनों के बीच ऐसे सामंजस्य बिठा लेते हैं, जैसे कोई अनुभवी मम्मी दो जिद्दी बच्चों को एक ही लॉलीपॉप से चुप करा दे। मुकेश अंबानी को ‘ग्लोबल सेटिंग मास्टर’ का खिताब मिलना चाहिए, क्योंकि उनकी ‘रेंज’ मोदी के गुजरात से ट्रंप के टेक्सास तक आती है। मुकेश जी सचमुच ऐसे “सुपर ग्लू” ( चिपकाने वाला पदार्थ ) हैं जोकि उन नेताओं को भी साथ चिपका देते हैं जिनके विचार उत्तर और दक्षिण ध्रुव की तरह अलग होते हैं। मुझे लगता है कि अंबानी जी के पास वो हुनर है कि अगर वो कल को मंगल ग्रह पर भी जाएं, तो एलियंस को ‘फ्री डेटा’ देकर वहां से तेल निकालने की परमिशन ले आएंगे. ट्रंप साहब का उनके लिये ‘थैंक यू’ बोलना ऐसा है जैसे स्कूल का सबसे खूंखार प्रिंसिपल किसी स्टूडेंट को ‘वेरी गुड’ दे दे।
इंजी. मधुर चितलांग्या
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


