व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी पर आज सुबह से ही ‘नारी तुम श्रद्धा हो’ त्याग, समर्पण, ममता और न जाने क्या-क्या . पढ़ते-पढ़ते मैं इतना अभिभूत हो गया कि मुझे लगा अपनी पत्नी के पैर धोकर पीने चाहिए। पर जैसे ही मैं कमरे से बाहर निकला और उसने पूछा—”सुबह से फोन में घुसे हो, घर खोलकर दूध की गंजी निकाली या नहीं?” मेरा सारा ‘अभिभूत’ होना हवा हो गया।
तभी मेरे एक परम मित्र आये और पूछने लगे कि ‘महिला दिवस पर कुछ लिख रहे हो या नहीं?’ मैंने जवाब दिया , नहीं भाई । यह सुनते ही उन्होंने मुझे लताड़ा और कहा,जिस दिन जो ‘दिवस ‘ होता है, उस दिन उस टॉपिक पर कम से कम एक ‘पैरा ’ तो लिखा ही जाता है. जैसे फ़र्स्ट अप्रैल के दिन राहुल गांधी पर लोगों के द्वारा लिखा जाता है। मैं बोला , एक विचार मेरे मन में आया था पर उसे कागज़ पर उतारने में कोई नाराज़ तो नहीं हो जायेगा ? उन्होंने कहा सुना तो सही . अब मैं बोल उठा , पिछले माह उनका दिवस था, जिन्होंने एक बार ही तांडव किया था…अर्थात महाकाल भोले बाबा…. पर आज उनका दिवस है, जिन्होंने भोले बाबा पर भी तांडव किया….अर्थात आदि शक्ति माँ काली….आगे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है….इसलिए आज का दिन चुप-चाप काट लो.
अब वे बोले , गड़बड़ है बॉस . बस , तुम अपनी आंखें बंद लो और सोचो, अपने जीवन में आई महिलाओं के लिये क्या भाव मन में आते है ? और जाते-जाते मेरे माथे पर एक बिंदी लगा गये. सचमुच मेरे दोस्त की बात ने मेरे मर्म को स्पर्श कर दिया . अब मेरी कलम बोल उठी , औरत प्रेम का अवतार होती है , वह मनुहार करती है , वह गुहार करती है . वह सृजन करती है , वह पालन करती है , वह गृहस्थी का संसार बसाती है , वह जननी होती है . वह सौंदर्य होती है , वह रसीली होती है , छैल छबीली होती है . वह अर्धांगी होती है , सुख दुख की साथी होती है . वह शक्ति होती है ,वह भक्ति होती है , वह प्रेरणा होती है . वह मां होती है, वह बहन होती है , वह पत्नि होती है ,वह बेटी होती है ,वह प्रेयसी होती है. लिखते- लिखते मैं भावनाओं के समंदर में डूबकर खुद से बोल उठा , इस बदसूरत अधूरी दुनिया को वो हर तकलीफ और ज़ुल्म सहकर भी खूबसूरती से पूरा करती हैं . सचमुच , नारी बहुत महान होती है .
इंजी. मधुर चितलांग्या ,
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


