अभी हाल ही में डॉग शो में एक कुत्ता साढ़े तीन किलोमीटर दूर से विस्फोटक सूंघ रहा था. इसे देखकर एक पीड़ित नागरिक ने सुझाव दिया— “इस कुत्ते को विस्फोटक नहीं, बल्कि ‘निगम अधिकारी’ सूंघने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. जैसे ही किसी मोहल्ले में निगम का कोई साहब दिखे , कुत्ता ‘टार्गेट’ सूंघकर झट से साहब का स्वागत अपने दांतों से करे. इससे दो फायदे होंगे:
1.निगम वालों को आम जनता का दर्द (और दांत) समझ आएगा.
2.सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शनों का कोटा हमेशा फुल रहेगा “.
दरअसल यह बात उठी थी कि एक निगम अधिकारी को कुत्ता काट लेने के बाद उस मोहल्ले में नगर निगम का अमला आवारा कुत्तों के पीछे पड़ गया है और सारे खस्सू कुत्तों को पकड़ कर ले गया लेकिन वह कुत्ता गायब हो गया था, जिसने साहब को काटा था . दूसरे शब्दों में कहें कि वह शिकार करने के बाद गायब होने का पैंतरा जानता था. कॉलोनीवासी अब उस ‘काटकर गायब’ होने वाले कुत्ते को ढूंढ रहे हैं ताकि उसका अभिनंदन किया जा सके. उसकी एक ‘बाइट’ ने नगर निगम और अस्पताल प्रशासन दोनों को ‘सेंसिटिव’ बना दिया है. कुछ दूसरे मोहल्ले के लोग उस कुत्ते को दैवीय शक्ति मानकर उसे अपने मोहल्ले में बुलाने का अनुष्ठान/आव्हान कराने लगे हैं.
इंजी. मधुर चितलांग्या “माधो”
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


