कंफर्म टिकट होने पर भी सीट नहीं मिली,भारतीय रेलवे पर उपभोक्ता आयोग ने 35,000 का लगाया जुर्माना

एक उपभोक्ता अदालत ने भारतीय रेलवे को यात्रियों को आरक्षित बर्थ उपलब्ध न कराने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। भोजपुर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को उन चार यात्रियों को 20,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है, जिन्हें पूरी ट्रेन यात्रा खड़े होकर पूरी करनी पड़ी।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, यह शिकायत तब सामने आई जब विंध्याचल (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) से आरा (भोजपुर, बिहार) जा रही एलटीटी पटना एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे चार यात्रियों ने ट्रेन में चढ़ते समय पाया कि उनकी आरक्षित बर्थ पर रेलवे कर्मचारी बैठे हुए थे।

शिकायत में कहा गया है कि यात्रियों ने कर्मचारियों से अपनी आरक्षित बर्थ खाली करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें उनकी सीट नहीं दी गई। कृष्णा प्रताप सिंह (अध्यक्ष) और कमल किशोर सिंह (सदस्य) की पीठ ने पाया कि रेलवे की सेवा में खामियों के कारण यात्रियों को “मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न” का सामना करना पड़ा।

पीठ ने उत्तर मध्य रेलवे और रेल मंत्रालय को आदेश दिया कि वे बुकिंग राशि 1,876.80 रुपये 8% वार्षिक ब्याज सहित वापस करें और 20,000 रुपये मुआवजे के रूप में तथा 15,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 60 दिनों के भीतर भुगतान करें।

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