ट्रंप ने खोजा नोबेल पाने का ‘शॉर्टकट’ : अब आत्मा को शांति जरूर मिल गई होगी!

ट्रंप साहब की नोबेल पाने की तड़प ऐसी थी जैसे किसी कुंवारे की सेहरा बांधने की हसरत। उन्होंने दुनिया भर के युद्ध रोकने के दावे किए, देशों को ‘धमकाकर’ शांति लाने की कोशिश की, पर कम्बख्त नोबेल कमेटी का दिल नहीं पसीजा। पिछले साल जब यह पुरस्कार वेनेजुएला की मारिया मचाडो को मिला, तो ट्रंप का चेहरा वैसा ही हो गया होगा जैसा ‘पनीर टिक्का’ ऑर्डर करने पर ‘लौकी की सब्जी’ मिलने पर होता है। लेकिन ट्रंप ठहरे असली बिजनेसमैन! उन्होंने सोचा—पुरस्कार कमेटी नहीं दे रही तो क्या हुआ, हम ‘कस्टमर’ से डायरेक्ट डील करेंगे। उधर सेना भेजी, इधर वेनेजुएला से मादुरो को पकड़ा और मारिया जी इतनी गदगद हुईं कि अपना नोबेल मेडल ट्रंप को ऐसे थमा दिया . जैसे कोई मोहल्ले की आंटी अपनी जीती हुई ‘किटी पार्टी’ की थाली किसी खास मेहमान को दे देती हैं। दुनिया माथा पीट रही है कि भाई, नोबेल पुरस्कार है या ‘नेटफ्लिक्स का पासवर्ड’ जो किसी को भी शेयर कर दिया? पर ट्रंप मगन हैं, आत्म मुग्ध हैं ! खैर, गालिब का शेर तो उन पर फिट बैठता है , दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है .
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स

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