लोकसभा में अमित शाह के भाषण पर राहुल गांधी बोले, गृहमंत्री बहुत घबराए हुए थे

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को संसद से बाहर मीडिया से बात करते हुए, बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर जवाब दिया था।

😟 “शाह मानसिक दबाव में थे”

राहुल गांधी ने दावा किया कि अमित शाह अपने भाषण के दौरान घबराए हुए थे और मानसिक दबाव में थे, जिसका असर उनकी भाषा पर दिखा।

राहुल गांधी ने कहा:

“अमित शाह कल घबराए हुए थे, उन्होंने गलत भाषा का इस्तेमाल किया, उनके हाथ कांप रहे थे। वे मानसिक दबाव में है, यह कल संसद में दिख रहा था।”

उन्होंने आगे कहा कि गृहमंत्री ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई बात नहीं की और न ही कोई सबूत दिया। राहुल गांधी ने चुनौती दोहराते हुए कहा, “मैंने कल उन्हें चुनौती दी कि आ जाइए सदन में मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा करते हैं, पर कोई जवाब नहीं मिला।”

⚔️ शाह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

दरअसल, ‘चुनाव सुधार’ पर संसद में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने मंगलवार को सरकार से तीन सवाल पूछे थे। इसके जवाब में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में तीखा पलटवार किया था:

  • ‘वोट चोरी’ का आरोप: शाह ने कांग्रेस पर ‘वोट चोरी’ के बेबुनियाद आरोप लगाने का आरोप लगाया और कहा था कि चुनावी गड़बड़ियां तो जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के जमाने से चली आ रही हैं।
  • एसआईआर पर चेतावनी: अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों को चेतावनी दी थी कि जो लोग एसआईआर (SIR) का विरोध करेंगे, वे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से खत्म हो जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से कहा था कि अगर तृणमूल कांग्रेस इस बिल का विरोध करती रही, तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पक्की है।
  • लोकतंत्र की छवि: शाह ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा था कि एसआईआर को लेकर केंद्र को घेरने की कोशिश करके विपक्ष सरकार की छवि खराब करने के बजाय भारत के लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।
  • हार का ठीकरा: गृहमंत्री ने कहा था कि जब विपक्ष हारता है, तो वह चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट को बदनाम करता है, जबकि भाजपा भी चुनाव हारी है, फिर भी उसने कभी चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाया।

❓ सवाल: क्या लोकतंत्र सुरक्षित है?

अमित शाह ने विपक्ष पर ‘एसआईआर’ (जिसका उल्लेख पहले की खबर में नहीं है) पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था और यह सवाल उठाया था कि अगर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री घुसपैठियों द्वारा तय किए जाते हैं, तो क्या लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है।

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