कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बच्चियों के नृत्य का एक वीडियो सामने आने के बाद पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम ने जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। जायरा वसीम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पूछा कि धार्मिक और सामुदायिक उद्देश्यों के लिए गठित संस्था के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में छोटी बच्चियों से मंच पर नृत्य क्यों कराया गया?
उनका तर्क है कि बच्चों को केवल नृत्य या मनोरंजन तक सीमित करने की बजाय उन्हें सोचने, सीखने, सृजन करने, चर्चा करने और समाज में योगदान देने के अवसर मिलने चाहिए।
देखा जाये तो जायरा वसीम के सवालों के साथ कुछ और सवाल भी खड़े होते हैं। सबसे पहला सवाल यही है कि स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में बच्चियों की भागीदारी आखिर समस्या क्यों बन गई? क्या मंच पर नृत्य करना अपने आप में बच्चियों की गरिमा, शिक्षा या स्वतंत्रता के खिलाफ है?
यदि प्रस्तुति बच्चों की स्वेच्छा, विद्यालय की गतिविधि और राष्ट्रीय पर्व के उत्सव का हिस्सा है, तो क्या उसे केवल इसलिए अनुचित मान लिया जाना चाहिए क्योंकि वह धार्मिक संस्था से जुड़े स्कूल में आयोजित हुई? और यदि यही कार्यक्रम किसी दूसरी संस्था के बैनर तले होता, तो क्या जायरा की आपत्ति उतनी ही तीखी होती?


