असम में 3000 बीघा जमीन एक कंपनी को देने पर हाई कोर्ट में सरकार

असम में सीमेंट की फैक्ट्री लगाने के लिए एक प्राइवेट कंपनी को आदिवासी जिले की 3 हजार बीघा जमीन आवंटित कर दी गई। गुवाहाटी हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश हुए ऐडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने कहा कि अगर किसी भी कारण से निवेशक चले जाते हैं तो यह पूरे असम के लिए बहुत चिंता की बात होगी। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ और उग्रवाद से निपटने के लिए आर्थिक विकास जरूरी है।
असम सरकार ने कहा दीमा हसाओ जैसे जिले आज भी उग्रवाद की चपेट में हैं। ऐसे में हम यहां की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 10 साल पहल नॉर्थ काचर का पहाड़ी इलाका हिंसा की चपेट में था। वहीं अब बंदूकें शांत हो गई हैं। इसका करण यही है कि आर्थिक विकास को गति मिली है।

सैकिया ने कहा कि आदिवासी जिले में फैक्ट्री लगने से करीब 11 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। अगर किसी भी सनकभरे कारण से निवेशक चले जाते हैं तो यह राज्य के लिए चिंताजनक होगा। इसके अलावा मुझे कुछ नहीं कहना है। वहीं जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि आर्थिक विकास के नाम पर पर्यावरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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