भद्रा काल में पूजा करने से फल की प्राप्ति होती है या नहीं

भद्रा काल का नाम सुनकर लोग डर जाते हैं और जानते हैं कि इस काल में शुभ कार्य नहीं होना चाहिए. लेकिन क्या भद्रा काल में पूजा-अर्चना कर सकते हैं, इस दौरान की गई पूजा का फल प्राप्त होता है या नहीं, यहां पढ़ें.

भद्रा काल को एक ऐसा काल माना जाता है जिसमें किसी भी शुभ कार्य को करना फलदायी नहीं माना जाता है. इसीलिए इस काल को हमेशा ध्यान में रखकर ही कार्य किया जाना चाहिए.

किसी भी विशेष, महत्वपूर्ण कार्य जैसे पूजा-पाठ को शुरू करने से पहले बहुत जरूरी होता है उस विशेष दिन का पंचाग देखना. पंचाग देखते समय ही चीज देखी जाती है कि उस मुहूर्त पर भद्रा काल तो नहीं.

भद्रा काल को अशुभ समय माना जाता है. इस दौरान बहुत से कार्य करना वर्जित होता है.इसीलिए इस दौरान शुभ कार्यों से बचना चाहिए. लेकिन भद्रा काल के दौरान हम पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान आदि कर सकते हैं.

भद्रा काल में मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. लेकिन पूजा इस दौरान की जा सकती है.

भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनि देव और यमराज की बहन थी. चंद्रमा की स्थिति के अनुसार इसका वास बदलता रहता है.

भद्रा का वास स्वर्ग,पाताल और पृथ्वी यानि तीनों लोगों में है. जब भद्रा का वास पृथ्वी पर होता है, तो इसे अशुभ माना जाता है.जब भद्रा का वास स्वर्ग या पाताल लोक में होता है, तो यह शुभ फलदायी हो सकती है.

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