छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग के ठेकेदार…कैसे श्रम कानून अवमानना मामले के दोषी साबित होंगे ?

पूरब टाइम्स, दुर्ग रायपुर. श्रमिकों के अधिकारों के लिए सरकार ने अनेक नियम बनाए हैं । इन नियमों का पालन कराने के लिए निर्माण विभाग जैसे जल संसाधन , लोक कर्म विभाग इत्यादि अपने टेंडर की शर्तों में उन नियमों व कानूनों के पालन की शर्तें रख देते हैं । ठेकेदार उन नियमों में कुछ का पालन करते हैं और कुछ का पालन ,केवल कागजी खानापूर्ति करके, पूरा होना बताया देते हैं । नियम के अनुसार यह उस विभाग के अधिकारी / कर्मचारी की जिम्मेदारी रहती है कि सभी श्रम नियमों का निर्माण साइट पर ठेकेदारों से पालन करवाया जाए परंतु वे गुपचुप आपसी सेटिंग या फिर अपनी लापरवाही बरतने की कार्यशैली के कारण , अपनी इस जिम्मेदारी को अनदेखा कर देते हैं । अब हालात ये होने लगे हैं कि अनेक अधिकारी, ठेकेदारों से केवल कागजी खानापूर्ति करवा , उन्हें क्लीन चिट दे देते हैं । अनेक पीड़ितों व
समाज सेवियों की शिकायतों को, ठेकेदार के हक में ठंडे बस्ते में डालने वाले ऐसे अधिकारियों ने अब अपने ऊपर कानूनी कार्यवाही की आशंका देख कर ठेकेदारों को , शिकायतों के जवाब देने के
लिए नोटिसें देनी शुरू कर दीं हैं । अब देखने वाली बात यह होगी कि ठेकेदार श्रम कानूनों की अवहेलना से कब दंडित होंगे ? इसके साथ ही, जांच के बाद जल संसाधन विभाग के अनेक अधिकारी भी कानून के अनुसार सजा पाते हैं या नहीं ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट

जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों द्वारा नियोजित श्रमिकों को उनका श्रमिक अधिकार दिलवाने के लिए श्रम विवरणी को सार्वजनिक किए जाने के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करवाने के लिए जन जागरूकता लाने को पहल कर रहा हूं।
अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता 

श्रमिकों के श्रम कार्य घंटों का दस्तावेजों प्रमाण नियोजक द्वारा रखे जाने की कानूनी बाध्यता है जिसके नहीं होने पर नियोजक की जवाबदेही सुनिश्चित करवाने वाले विधिक प्रावधान भी श्रम विधि में है जिसके आधार पर नियोजक को श्रमिकों के अधिकारों पर अतिक्रमण करने से रोका एवं दंडित करवाया जा सकता है ।
अधिवक्ता यामिनी मैथिल

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