CG : आंगनबाड़ी बना स्वास्थ्य और शिक्षा सशक्तिकरण का केंद्र

वजन त्यौहार में बच्चों व गर्भवती महिलाओं की जांच, कुपोषण की पहचान कर उपचार से जोड़ा गया
देवार समाज की शाला त्यागी किशोरियों को फिर से स्कूल से जोड़ने पहल
महासमुंद, 14 फरवरी 2026

जिले में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण उन्मूलन के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 9 से 18 फरवरी तक “वजन त्यौहार” का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में शहरी परियोजना अंतर्गत डॉ. सुशील सैमुअल वार्ड (सेक्टर-01) में विशेष शिविर आयोजित कर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में पार्षद राहुल आवड़े एवं सुनैना पप्पू ठाकुर उपस्थित रहे। अतिथियों ने बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया तथा उनका वजन एवं ऊंचाई मापकर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।

कुपोषित बच्चों की पहचान, विशेष पोषण व उपचार से जोड़ने की पहल

शिविर के दौरान कुपोषित एवं अत्यंत कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेष पोषण आहार तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधा से जोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आयरन, कैल्शियम एवं संतुलित पोषण संबंधी परामर्श दिया गया।

पालकों को आहार तालिका प्रदान कर बच्चों के खान-पान में सुधार हेतु मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही स्वच्छता, हाथ धोने की आदत और नियमित टीकाकरण के महत्व पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया।

अतिथियों ने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रतिबद्ध है और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित अभियानों से कुपोषण के खिलाफ प्रभावी परिणाम सामने आ रहे हैं। महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक संबल मिलने से परिवार के पोषण स्तर में भी सुधार संभव हुआ है।

पोषण रिपोर्ट के माध्यम से पालकों को जागरूक किया गया

शिविर में स्वास्थ्य जांच के बाद पालकों को बच्चों की पोषण रिपोर्ट समझाई गई। बताया गया कि जीवन के शुरुआती छह वर्ष शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव होते हैं। नियमित जांच, संतुलित आहार और स्वच्छता अपनाकर बच्चों को एनीमिया एवं कुपोषण जैसी समस्याओं से बचाया जा सकता है।

कार्यक्रम का आयोजन सुपरवाइजर शीला प्रधान के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लल्ली आर्य, तीज बाई, आभा साहू, मितानिन, पालकगण एवं बच्चे उपस्थित रहे।

शाला त्यागी किशोरियों को पुनः स्कूल से जोड़ने पहल

शिविर के दौरान शाला त्याग चुकी किशोरी बालिकाओं को पुनः विद्यालय से जोड़ने के लिए भी विशेष समझाइश दी गई। देवार समाज की धनेशी, बृजला, मालिनी और कृतिका नामक चार किशोरियों को परामर्श के माध्यम से दोबारा स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अतिरिक्त पालकों को न्योता भोज की परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए विशेष अवसरों पर आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजन कर सामाजिक सहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया गया।

आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं रहकर स्वास्थ्य जांच, शिक्षा जागरूकता और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी मंच बनते जा रहे हैं।

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