–साढ़े तीन माह में दो हजार से अधिक लोगों को मिली ईलाज क़ी सुविधा
-आधुनिक चिकित्सा पद्धति पर जागा लोगों का विश्वास
रायपुर। मोबाइल मेडिकल यूनिट दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जो घर-घर जाकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त जांच और दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। यह पहल विशेष रूप से कमजोर और दुर्गम इलाकों में समय पर इलाज सुनिश्चित करके गंभीर बीमारियों को रोकने और स्वास्थ्य समानता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ में विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए 57 नई मेडिकल मोबाइल यूनिट शुरू की गई हैं, जो 25 तरह की बीमारियों का मुफ्त इलाज कर रही हैं।
राज्य शासन की मंशानुसार दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में मोबाईल मेडिकल यूनिट वरदान साबित हो रही है। पहले इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को मिलों पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब अस्पताल खुद उनके गली मोहल्लों तक पहुंच रहा है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विशेष पिछडी जनजाति कमार बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई में प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से एक मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इन दोनों गांव के साथ ही यह यूनिट कसडोल क्षेत्र के अन्य ग्रामों में भी कैम्प लगाती है। लगभग साढ़े तीन माह में इस यूनिट से 2035 लोगों ने निःशुल्क ईलाज का लाभ लिया हैं।
इस मोबाइल मेडिकल यूनिट में इन यूनिटों में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक जांच उपकरण और मुफ्त दवाएं उपलब्ध होती हैं।एक -एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स, ड्राइवर क़ी टीम होती हैं। इसमें चिकित्सा सलाह सहित इन यूनिटों के माध्यम से मलेरिया, टीबी, कुष्ठ, ओरल कैंसर, सिकल सेल और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हो पा रहा है। गांव के पारा -मोहल्ले में कैम्प लगाने क़ी तिथि व स्थान एक माह पूर्व निर्धारित हो जाती हैं। कैम्प लगने क़ी सूचना ग्रामीणों को मुनादी से दी जाती है। सुदूर बस्तियों में रहने वाले लोगों को अब सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए शहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।


