पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद बना आजीविका का साधन

पारंपरिक कौशल, जैसे मिट्टी के बर्तन, कढ़ाई और लकड़ी का काम, स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान योजना के तहत जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ रही हैं।

कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार की हरियाली स्व-सहायता समूह की 11 महिलाओं ने छिंद कासा से आकर्षक टोकरी और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है।

    समूह की सदस्य बालमुनि भगत ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला। पहले महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित थीं, लेकिन अब वे अच्छी कमाई कर रही हैं। यह कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दे रहा है। उन्होंने बताया कि यह न केवल एक व्यवसाय है, बल्कि यह परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाता है।

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