’मछली पालन को कृषि का दर्जा मिलने से लागत में आई 10 प्रतिशत की कमी, देश में अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में छत्तीसगढ़ छठवें स्थान पर’
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जल-संरचना और अनुकूल जलवायु के चलते मछली पालन अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों और मछुआरा हितैषी योजनाओं के कारण छत्तीसगढ़ आज मत्स्य बीज उत्पादन में न केवल पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है, बल्कि देश में अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में छठवें स्थान पर है, जहाँ सालाना 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। मतस्य पालन मंत्री राम विचार नेताम आज राजधानी रायपुर में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में कुल उपलब्ध 2.081 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र में से 96.25 प्रतिशत क्षेत्र को मछली पालन के अंतर्गत विकसित कर लिया गया है। इसके माध्यम से राज्य के 2.25 लाख से अधिक मछुआरों को स्वरोजगार के स्थायी साधन मिले हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार छत्तीसगढ़ के अंतिम व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मछली पालन को कृषि का दर्जा दिए जाने से आज हमारे मत्स्य पालकों को बिजली दरों में छूट, ब्याज मुक्त ऋण और पानी की दरों में बड़ी राहत मिल रही है।


