देश की न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है. लेकिन अब कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ पीठ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे भारतीय न्यायिक इतिहास का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. पहली अगस्त से धारवाड़ बेंच के सभी सात कोर्ट रूम में सिर्फ महिला जज ही न्यायिक कार्यवाही करेंगी. यानी एक भी पुरुष न्यायाधीश इस रोस्टर का हिस्सा नहीं होगा.
हाईकोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब किसी हाईकोर्ट की पूरी बेंच का कामकाज पूरी तरह महिला न्यायाधीशों के हाथ में होगा. यह फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भूमिका, उनकी क्षमता और नेतृत्व पर बढ़ते भरोसे का भी प्रतीक माना जा रहा है.
इस ऐतिहासिक रोस्टर को लेकर न्यायिक जगत, वकीलों और महिला संगठनों में उत्साह का महीनेौल है. इसे न्याय व्यवस्था में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है.


