अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कड़े नियमों और वैश्विक नियंत्रण का विरोध किया है। उनका तर्क है कि AI के विकास पर ज्यादा प्रतिबंध लगाने से अमेरिका की तकनीकी प्रगति धीमी हो सकती है और चीन को इस क्षेत्र में बढ़त हासिल करने का मौका मिल सकता है।
ट्रंप ने AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जारी तकनीकी प्रतिस्पर्धा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि जो देश AI की दौड़ में आगे रहेगा, उसे रणनीतिक बढ़त हासिल होगी। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उन्होंने AI को नियंत्रित करने वाली किसी वैश्विक व्यवस्था के प्रयासों का विरोध किया।
हालांकि, AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर हमलों को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, AI का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों, जासूसी, निगरानी, धोखाधड़ी और खतरनाक तकनीकों के विकास में किया जा सकता है।
अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि उसके Claude AI मॉडल का इस्तेमाल कुछ विदेशी तत्वों ने साइबर गतिविधियों और अन्य खतरनाक अभियानों के लिए करने की कोशिश की। इसी तरह, Google ने भी चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान से जुड़े समूहों द्वारा अपने Gemini AI मॉडल के संभावित दुरुपयोग के प्रयासों की जानकारी दी है।
ट्रंप का मानना है कि अमेरिका की सुरक्षा और रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी कंपनियों का AI क्षेत्र में चीन से आगे रहना जरूरी है। वहीं, AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए तकनीक पर सुरक्षा मानकों और नियमन की जरूरत को लेकर विशेषज्ञों और विभिन्न देशों के बीच बहस जारी है।
चीन भी AI के क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच AI को लेकर प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में तकनीक, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रह सकती है।


