संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयानों पर जवाब देते हुए आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और मानवाधिकारों का मुद्दा उठाया। 26 सितंबर को भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत पाकिस्तान पर कई आरोप लगाए।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बात करने वाले पाकिस्तान को पहले अपनी व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में सेना की भूमिका और सैन्य नेतृत्व को मिले संवैधानिक संरक्षण का भी मुद्दा उठाया।
कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया।
ओसामा बिन लादेन का भी किया जिक्र
भारत ने अपने जवाब में 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी का उल्लेख करते हुए अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का मुद्दा उठाया। पेटल गहलोत ने कहा कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के बयानों पर सवाल उठाए।
ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख
भारत ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई का जिक्र करते हुए 7 मई 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। पेटल गहलोत ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है। उन्होंने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद जारी रखने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी।
धार्मिक अल्पसंख्यकों का मुद्दा भी उठा
भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति और ईशनिंदा कानून को लेकर भी सवाल उठाए। पेटल गहलोत ने धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर पाकिस्तान के बयानों की आलोचना करते हुए वहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लेख किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस जवाब के दौरान आतंकवाद, कश्मीर और पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था प्रमुख मुद्दे रहे। वहीं, पाकिस्तान ने भारत के आरोपों को खारिज करते हुए भारत पर भी आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं।


