सचिव खनिज संसाधन पी. दयानंद ने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाते है। इन खनिजों के लिए राज्य सरकार के द्वारा अन्वेषण एवं उत्खनन हेतु खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यम से खनन हेतु उपलब्ध कराया जाता है। जिससे राज्य शासन को राजस्व की प्राप्ति में पिछले 02 वर्षों में उल्लेखनियवृद्धि हुई है।
सी.एम.डी.सी. भी इस राज्य में अन्वेषण एवं खनन से संबंधित कार्यों के संपादन का सहभागी है। छत्तीसगढ़ राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को खनिज के आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने तथा खनिज राजस्व में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कार्पाेरेशन (सी.एम.डी.सी.) का गठन 07 जून 2001 में किया गया। सी.एम.डी.सी. के कार्य संचालन का स्वरूप माईनिंग एण्ड मार्केटिंग ठेका,उत्खनन ठेका, मार्केटिंग ठेका, एमडीओ, अन्वेषण एवं संयुक्त उपक्रम के माध्यम सेअन्वेषण एवं खनन कार्य वर्तमान में कार्यरत् है।
श्री दयानन्द ने बताया कि वर्तमान में 09 खनिजों के खनन/मार्केटिंग एवं अन्वेषण का कार्य सी.एम.डी.सी. के द्वारा किया जा रहा है (टिन,बाक्साईट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैग्नीज, कोरण्डम, डोलोमाईट, कोयला)। (टिन) वर्तमान में सी.एम.डी.सी. के द्वारा बस्तर के अनुसूचित जनजातियों के जीविकोपार्जन के लिए विशेष रूप से टिन अयस्क की खरीदी का कार्य किया जा रहा है। संयुक्त उपक्रम के माध्यम से खनन एवं टिन स्मेल्टर का भी संचालन किया जा रहा है। यह खनिज भी क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में आता हैं।


