गरियाबंद में धूमधाम से मनाया गया हरेली पर्व, भूपेश बघेल बोले – “हरेली हमारी आत्मा है”

गरियाबंद,– छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित पारंपरिक तिहार हरेली का पर्व गरियाबंद जिले में इस वर्ष भी पूरी धूमधाम, उल्लास और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति, जिन्होंने इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए छत्तीसगढ़ी परंपरा का निर्वहन किया।

हरेली के इस अवसर पर गांव-गांव में बैल, खेती के औजारों और पशुओं की पूजा की गई। ग्रामीणों ने परंपरागत खेल जैसे गेड़ी दौड़, भौंरा, कबड्डी, रस्साकशी जैसे आयोजन किए, जिससे गांव का माहौल पूरी तरह तिहारमय हो गया।
भूपेश बघेल ने निभाई परंपरा

भूपेश बघेल ने पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर खुद गेड़ी चढ़ी, बच्चों के साथ भौंरा खेला और किसानों को कृषि उपकरण बांटे। उन्होंने कहा,

हरेली केवल तिहार नहीं, यह हमारी आत्मा है। इससे हमारी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति प्रेम झलकता है। छत्तीसगढ़ की खुशबू इसी मिट्टी और इन परंपराओं में बसती है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी जड़ों और लोकसंस्कृति से जुड़े रहें।

ग्रामीणों में दिखा उत्साह

ग्राम पंचायतों, स्कूलों और समाजिक संगठनों की भागीदारी से हर गांव में आयोजन हुआ। महिला समूहों ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत गाए और पारंपरिक व्यंजनों से मेहमानों का स्वागत किया। गेड़ी दौड़ और बैल सजाओ प्रतियोगिताओं ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को खूब रोमांचित किया।

संस्कृति का उत्सव

हरेली तिहार अब केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं रहा, यह छत्तीसगढ़ी अस्मिता और एकजुटता का प्रतीक बन चुका है। गरियाबंद में इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि परंपराएं आज भी जीवंत हैं और नई पीढ़ी उन्हें गर्व के साथ अपना रही है।

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