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Wednesday, March 4, 2026
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चीन का तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर बांध का निर्माण

चीन का तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर बांध का निर्माण न केवल तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक प्रभाव भी गंभीर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:

  1. क्षमता और स्थान:
    • यह बांध तिब्बत की यारलुंग जांग्बो नदी पर बनाया जाएगा, जो ब्रह्मपुत्र नदी के रूप में भारत और बांग्लादेश से होकर बहती है।
    • इसकी वार्षिक बिजली उत्पादन क्षमता 300 बिलियन KWH होगी, जो वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े थ्री गॉर्जेस डैम (88.2 बिलियन KWH) की तुलना में तीन गुना से अधिक है।
  2. लागत और विस्थापन:
    • परियोजना की अनुमानित लागत $34.83 बिलियन (लगभग 3,000 अरब रुपये) है।
    • इस निर्माण के कारण 14 लाख से अधिक लोगों को पुनः बसाना पड़ेगा, लेकिन स्थानीय पर्यावरण और समुदाय पर प्रभाव की पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
  3. पर्यावरणीय और भू-भौतिकीय चिंताएं:
    • नदी के प्रवाह और बहाव में बदलाव का खतरा है, जिससे भारत और बांग्लादेश के लाखों लोगों की जल आपूर्ति और कृषि प्रभावित हो सकती है।
    • तिब्बत का यह क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील है। इससे भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
    • विशेषज्ञों का दावा है कि इतना विशाल जलाशय पृथ्वी की घूर्णन गति और ध्रुवीय स्थिति पर प्रभाव डाल सकता है।
  4. चीन की रणनीति:
    • यह परियोजना चीन के “कार्बन न्यूट्रैलिटी” और “ग्रीन एनर्जी” लक्ष्यों का हिस्सा है।
    • इसके माध्यम से चीन तिब्बत में रोजगार के अवसर बढ़ाने और अपनी इंजीनियरिंग क्षमता को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।

भारत और बांग्लादेश की चिंताएं:

चीन द्वारा इस परियोजना पर काम शुरू करने से दोनों देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बांध के कारण ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह और जल संसाधनों पर नियंत्रण का खतरा मंडरा रहा है। इससे भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम के साथ-साथ बांग्लादेश के लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

क्या पृथ्वी की गति वाकई प्रभावित होगी?

पिछले अनुभव के आधार पर वैज्ञानिकों ने इस संभावना को खारिज नहीं किया है। नासा के वैज्ञानिक बेंजामिन फोंग चाओ ने थ्री गॉर्जेस डैम के पृथ्वी की घूर्णन गति पर प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे। जब नया बांध उससे तीन गुना बड़ा होगा, तो प्रभाव की तीव्रता और भी अधिक हो सकती है।

यह परियोजना पर्यावरणीय जोखिमों, अंतरराष्ट्रीय तनाव, और तकनीकी क्षमताओं के एक जटिल मिश्रण का प्रतिनिधित्व करती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन इस पर वैश्विक और स्थानीय चिंताओं को कैसे संबोधित करता है।

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