स्वागत है दुनिया की सबसे वीआईपी ‘अटेंडेंस शीट’ में ! जेफरी एपस्टीन की फाइलें दरअसल उस हाई-प्रोफाइल किट्टी पार्टी का मेन्यू कार्ड हैं, जहाँ मुख्य कोर्स में ‘पावर’ और डेजर्ट में ‘अपराध’ परोसा जाता था. 60 लाख से अधिक दस्तावेजों, तस्वीरों और वीडियो के इस जखीरे में दुनिया के भाग्यविधाताओं की कई गतिविधियाँ दर्ज हैं. ये फाइलें किसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ‘अराइवल’ बोर्ड जैसी हो गई हैं—ट्रम्प, क्लिंटन, गेट्स और अब भारतीय तड़का ! जब तक नाम विदेशी थे, हम पॉपकॉर्न खा रहे थे . जैसे ही देशी नाम आए, मामला ‘राष्ट्रवाद’ पर अटक गया. सफाई ऐसी दी जाती है जैसे वे एपस्टीन को जानते ही न थे, बस कभी चौराहे पर चाय पीते देख लिया था. कुछ लोग तो गजब हैं , फाइल में नाम को ‘टाइपिंग मिस्टेक’ तक बता देते हैं . दस्तावेज़ों में नाम होने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति दोषी है और भले ही अदालत उसे सबूत न माने, पर सोशल मीडिया की कचहरी में तो फांसी की सजा सुना दी जा रही है. लोग खिल्ली ऐसे उड़ा रहे हैं जैसे एपस्टीन के द्वीप पर वे खुद गाइड का काम करते थे. रसूखदार लोग कोर्ट के चक्कर काटने से नहीं, बल्कि लोगों की ‘खिल्ली’ से डर रहे हैं. कहा जा रहा है कि लाखों पन्ने बाहर आए, पर ‘खास’ पन्ने अभी भी तिजोरी में बंद हैं. ये वैसी ही पारदर्शिता है जैसे किसी पारदर्शी पर्दे के पीछे लाइट बंद कर दी जाए. जो नाम बाहर आए, वे ‘बलि के बकरे’ बने और जो अंदर रह गए, वे ‘शिकारी’ बने बैठे हैं.
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स , भिलाई


