सीबीएसई की तीन भाषाओं की अनिवार्यता ने छात्रों और शिक्षकों की चिंता बढ़ाई,DMK ने किया विरोध

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। 1 जुलाई 2026 से 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, बोर्ड ने छात्रों को राहत देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि कक्षा 10वीं में इस तीसरी भाषा के लिए कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।

दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी
15 मई को जारी किए गए एक आधिकारिक सर्कुलर में बोर्ड ने बताया कि छात्रों द्वारा चुनी जाने वाली इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। सीबीएसई का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023 के नियमों के तहत उठाया गया है।

डीएमके ने फैसले का किया विरोध
सीबीएसई की इस तीन-भाषा नीति पर चेन्नई में डीएमके के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, “हम इस तीन-भाषा नीति का पूरी तरह विरोध करते हैं।

इसे अभी क्यों लागू किया जा रहा है? क्योंकि सरकार बदलने के साथ ही उन्हें लगता है कि वे दबाव डालकर इसे जबरन लागू करवा सकते हैं। हम देखेंगे कि इस संवेदनशील मुद्दे पर हमारी राज्य सरकार कैसी प्रतिक्रिया देती है और इसका सामना कैसे करती है।”

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